जिस्म को चादर बनाया ही नहीं
रात भर दीपक बुझाया ही नहीं
फ़र्ज़ उसको जो निभाना चाहिए
वो कभी उसने निभाया ही नहीं
हाल दिल का सब कहा है शे'र में
राज़ कुछ उन सेे छुपाया ही नहीं
जो कहा था शे'र उनके वास्ते
वो कभी उनको सुनाया ही नहीं
मैं बहुत ही चाहता उसको रहा
पर कभी उसको बताया ही नहीं
बाँट लेते आपके हम दर्द-ओ-ग़म
आपने अपना बनाया ही नहीं
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