khulti hai meri neend har ik raat do baje | खुलती है मेरी नींद हर इक रात दो बजे

  - Tanoj Dadhich

खुलती है मेरी नींद हर इक रात दो बजे
इक रात दो बजे मुझे छोड़ा था आपने

  - Tanoj Dadhich

Andhera Shayari

Our suggestion based on your choice

    सूरज लिहाफ़ ओढ़ के सोया तमाम रात
    सर्दी से इक परिंदा दरीचे में मर गया
    Athar nasik
    29 Likes
    ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
    मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

    हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए निजात
    इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
    Read Full
    Zaki Azmi
    24 Likes
    शायद किसी बला का था साया दरख़्त पर
    चिड़ियों ने रात शोर मचाया दरख़्त पर
    Abbas Tabish
    31 Likes
    सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
    अब किसे रात भर जगाती है
    Jaun Elia
    86 Likes
    दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी
    'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए
    Akhtar Shirani
    21 Likes
    तस्वीर में जो क़ैद था वो शख़्स रात को
    ख़ुद ही फ़्रेम तोड़ के पहलू में आ गया
    Adil Mansuri
    36 Likes
    हमारी याद आने पर अकेली रात में तुम भी
    कभी पंखा कभी टीवी कभी दीवार देखोगे
    Ambar
    जागना और जगा के सो जाना
    रात को दिन बना के सो जाना
    Ali Zaryoun
    53 Likes
    आधी रात की चुप में किस की चाप उभरती है
    छत पे कौन आता है सीढ़ियाँ नहीं खुलतीं
    Parveen Shakir
    26 Likes
    तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है
    आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
    Abhishek shukla
    29 Likes

More by Tanoj Dadhich

As you were reading Shayari by Tanoj Dadhich

    जीने का बस एक यही ढब अच्छा है
    मेरा तेरा सबका ही रब अच्छा है

    बंदा हो तो यार हमारे जैसा हो
    सब कुछ खोकर भी बोले, सब अच्छा है
    Read Full
    Tanoj Dadhich
    36 Likes
    अँगूठी के लिए पैसा नहीं था
    किया इज़हार हमने शेर से ही
    Tanoj Dadhich
    58 Likes
    एहसान तेरा पिछला चुकाया नहीं गया
    मुश्किल में अबकी बार बुलाया नहीं गया

    मैं तुझसे मिलने आ गया हूँ तेरे शहर तक
    और तुझसे रेलगाड़ी तक आया नहीं गया
    Read Full
    Tanoj Dadhich
    56 Likes
    पहले तो वो हाथ पकड़कर कमरे से बाहर लाया
    और फिर मुझको इस दुनिया में यार अकेला छोड़ गया
    Tanoj Dadhich
    38 Likes
    कभी भी ज़िन्दगी में कुछ अगर करना
    ग़रीबी से अमीरी तक सफ़र करना

    यहाँ जो जाम रक्खा है उधर करना
    वहाँ जो चाय रक्खी है इधर करना

    बहन और भाई से लड़कर दिवाली पे
    अभी तक याद है घर को कलर करना

    किसी के शेर जब उसके न रह जाएँ
    इसे कहते हैं शेरों को अमर करना
    Read Full
    Tanoj Dadhich

Similar Writers

our suggestion based on Tanoj Dadhich

Similar Moods

As you were reading Andhera Shayari Shayari