AMAN RAJ SINHA

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AMAN RAJ SINHA shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in AMAN RAJ SINHA's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

जो देखते थे दुनिया मेरी आँखों से कभी ऑंखें वही दिखा रहे हैं मुझ को आजकल — AMAN RAJ SINHA
यूँ देख कर तुझ को यही लगता है अब मासूमियत के तू ने पर्दे ओढ़े हैं — AMAN RAJ SINHA
मैं उसे जब धोखे खाते देखता हूँ सोचता हूँ बे-वफ़ाई की सज़ा तो बे-वफ़ाई होती है दोस्त — AMAN RAJ SINHA
हम दोनों के ग़म एक जैसे ही हैं दोस्त हम दोनों ही तन्हा बचे इस शहर में — AMAN RAJ SINHA
मैं ने भी जब दुनिया को उस की नज़र से देखा तो मुझ को भी ये दुनिया अब तो बे-वफ़ा ही लगती है — AMAN RAJ SINHA
वो एक लड़की मेरी पूरी दुनिया थी ये सिर्फ़ कहने सुनने की अब बातें हैं — AMAN RAJ SINHA
उसे मिल जो गए अच्छे नए मुख़्लिस नए जो थे पुराने हो चुके हैं अब — AMAN RAJ SINHA
अब मुझे उस पर यक़ीन इतना रहा है पानी तपती रेत में जितना रहा है — AMAN RAJ SINHA
चुराया है किसी ने मह-जबीं मुझ सेे 'इशा ने रौशनी को हर लिया जैसे — AMAN RAJ SINHA
दर्द कम होता कहाँ है रोने से बस ज़रा सा दिल तसल्ली पाता है — AMAN RAJ SINHA
परेशानी कभी मेरी बिना बोले समझ जाओ ज़बाँ से हर दफ़ा बोलूँ ज़रूरी तो नहीं है ना — AMAN RAJ SINHA
एक ये भी तल्ख़ सच है ज़िंदगी का मेरे दोस्त शख़्स कोई सिर्फ़ मेरा तो कभी होता नहीं — AMAN RAJ SINHA
फिर मुहब्बत करने की जब सोची मैं ने यार फिर हिजरत की आई याद मुझ को — AMAN RAJ SINHA
वो मुझ को जिस तरह से दुआएँ था दे रहा मैं तो समझ गया ये क़यामत की रात हैं — AMAN RAJ SINHA
मुझ को यहाँ पहचानने वाले बहुत से हैं मगर मुझ को यहाँ पर जानने वाला तो कोई भी नहीं — AMAN RAJ SINHA
मुझे रिश्ता नहीं मालूम है लेकिन वो अक्सर मेरी आँखों से ही रोती थी — AMAN RAJ SINHA
वो चाहता था लोग उस की फ़िक्र यूँँ करते रहें उस को ज़रा सा भी नहीं मतलब किसी के ग़म से है — AMAN RAJ SINHA
मरता नहीं है अब यहाँ कोई किसी के वास्ते था वक़्त जब वादों के ख़ातिर लोग मर तक जाते थे — AMAN RAJ SINHA

Ghazal