तुम्हारे बा'द कोई है हमारा नइँ
हमारा तो तुम्हारे बिन गुज़ारा नइँ
अगर सोचो मेरे तुम जो न होते तो
है इस बहती नदी का तो किनारा नइँ
किया अच्छा भँवर को थाम कर तुम ने
पता है अब कि कोई भी सहारा नइँ
उड़ा ये सोच कर ही घर को लौटूँगा
मगर अब तो परिंदे का गुज़ारा नइँ
सुना था ये बिछड़ कर मौत आती है
मुझे पल भर भी जीना अब गवारा नइँ
वफ़ा कर जो सज़ा हम को मिली है ये
उसे दिल से अभी तक है उतारा नइँ
सितारे आसमाँ में अब भी हैं मौजूद
मगर उन
में हमारा अब सितारा नइँ
— AMAN RAJ SINHA















