ये कहन का जो तरीक़ा है लुभाता क्या करें
तेरे होंठों का जो सरगम है बुलाता क्या करें
हुस्न जो तेरा है जाने क्या क़यामत है भला
तेरी आँखों का समुंदर है डुबाता क्या करें
ज़ुल्फ़ें ये बिखरी हुई है जो सुनहरी शाम सी
उस
में दिल जो ये शरारत है कराता क्या करें
— AMAN RAJ SINHA















