तुम को ये लग रहा है कि दीवानगी है दोस्तमेरी ग़ज़ल नहीं है मेरी ज़िंदगी है दोस्तगिर जो गया नज़र से तू हैरत नहीं मुझेअपना भी तू रहा नहीं शर्मिंदगी है दोस्तकहता था जो कभी मुझे बदलूँगा मैं नहींअब तो वो भी बदल गया हैरानगी है दोस्त— AMAN RAJ SINHA