एक ये भी तल्ख़ सच है ज़िंदगी का मेरे दोस्त
शख़्स कोई सिर्फ़ मेरा तो कभी होता नहीं
अब उसे मेरी ज़रूरत जो नहीं है
ये कहानी आगे बढ़नी तो नहीं है
अब उसे मिल जो गए हैं दोस्त अच्छे
यार जो थी बात बननी वो नहीं है
इस क़दर उसने जो ख़ुद को अब है बदला
यार वो जो थी न अब वो तो नहीं है
मरता नहीं है अब यहाँ कोई किसी के वास्ते
था वक़्त जब वादों के ख़ातिर लोग मर तक जाते थे
कहो मुझसे बिछड़ कर भूल जाओगी
बताओ भूल कर के क्या जी पाओगी
है इक दिन में तुम्हारी तो ये हालत सो
बिछड़ कर तो यक़ीनन मर ही जाओगी