जाम आँखों से पी लिया मैंने
    जितना जीना था जी लिया मैंने
    Zeeshan kaavish
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    तीरगी में मत बैठो रौशनी में आ जाओ
    चाँद का ये अरमाँ है चाँदनी में आ जाओ

    बेक़रार है ये दिल आपके लिए कब से
    छोड़ कर झिझक मेरी ज़िंदगी में आ जाओ
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    Zeeshan kaavish
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    अजी छोड़िए भी ये नफ़रत की बातें
    बहुत ही बुरी हैं सियायत की बातें

    उदासी की चादर लपेटे पड़ा हूँ
    करे कोई आके मुहब्बत की बातें

    तेरे हुस्न का ज़िक्र होगा यक़ीनन
    चलेंगी जहाँ भी क़यामत की बातें
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    Zeeshan kaavish
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    कभी फूलों से कहता है कभी भॅवरों से कहता है
    कभी ये दिल मेरा चुप चाप ही हर दर्द सहता है

    यक़ीं मानो मैं अपना राज़ ए दिल तुम को बताता हूँ
    जो मेरे दिल का दुश्मन है वो मेरे दिल में रहता है
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    Zeeshan kaavish
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    ख़ुशी भी रखते हैं और ग़म भी साथ रखते हैं
    हम अपने ज़ख़्म का मरहम भी साथ रखते हैं
    Zeeshan kaavish
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    हमने वतन के वास्ते क्या ख़ूब लिख दिया
    हमने वतन को अपना ही महबूब लिख दिया
    Zeeshan kaavish
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    तुझे ये दोस्त अपना फिर पुराना याद आएगा
    तुझे फिर ये मुहब्बत का ज़माना याद आएगा

    तू जितनी कोशिशें करले भुलाने की मुझे लेकिन
    तुझे अंदाज़ मेरा शायराना याद आएगा
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    Zeeshan kaavish
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    सभी पढ़ते रहे चेहरा हमारा
    किसी ने दिल नहीं देखा हमारा

    वो हमको हर तरह से भा गया है
    जिसे भाया नहीं चेहरा हमारा
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    Zeeshan kaavish
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    अपने दिल से मेरी यादों को हटाने वाला
    क्या मुझे भूल गया मुझको भुलाने वाला

    मुझको पीने की तमन्ना तो बहुत है लेकिन
    कोई मिलता नहीं आँखों से पिलाने वाला
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    Zeeshan kaavish
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    सच मान जैसा चाहा था वैसा नहीं मिला
    कोई भी इस जहान में तुझसा नहीं मिला
    Zeeshan kaavish
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