ABHISHEK RANJAN

Top 10 of ABHISHEK RANJAN

    याद
    मुझ को तेरी यादों ने बर्बाद किया
    हर पल तेरे पास में ले कर जाती हैं

    यादों को बोलो कि मुझ तक मत आऍं
    आती हैं तो फिर ये बड़ा रुलाती हैं

    आज भी उन गलियों से कभी गुज़रता हूँ
    ऐसा लगता है मानो हाॅं साथ में हो

    हाथ पकड़ के मेरा मुझ से कहती हों
    देखो मुझ को वो कपड़े दिलवाओ ना
    रंजन मुझ को उलझन में तुम लगते हो
    बोलो मुझ को राज़ की बात बताओ ना

    अच्छा बाबा सॉरी मेरी ग़लती है
    अपनी ग़ज़ल से कोई शे'र सुनाओ भी

    देखो मुझ को तुम्हारी उदासी खाती है
    मुझ को देखो और अधिक तड़पाओ मत

    हाथ पकड़ के मुझ को किसी ने खींचा था
    तब जाना की यादों का वो सपना था

    जो था मेरा वो क्या मेरा अपना था
    वही जगह थी जहाँ पे अंतिम बार मिले

    उन वादों को देखो अब तक निभा रहा
    तन्हा अपना जीवन देखो बिता रहा मैं

    यादों को अपने जीवन में डाला है
    उन यादों को देखो कैसे पाला है

    ऐसा लगता है मानो हाँ साथ में हो
    जो बोलूँ जो सोचूँ हर इक बात में हो

    रंजन तुम को काम मेरा एक करना है
    मुझ को उन की यादों से अब दूर करो
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    ABHISHEK RANJAN
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    "पापा"
    मेरी ख़्वाहिश मेरे पापा मेरा जीवन मेरे पापा
    अगर आया हूँ दुनिया में वो ज़रिया हैं मेरे पापा

    जो मेरी बात करते हैं ज़माने से भी लड़ जाए
    मुझे दर्पण दिखाते हैं ग़लत क्या है सही क्या है

    मुझे ग़ुस्सा दिखाते हैं मुझे पुचकारते भी हैं
    मगर दिल के वो सच्चे हैं वो जग में सब से अच्छे हैं

    मेरे अरमान के ख़ातिर वो आधी पेट खाते हैं
    वो ख़ुद का ग़म छुपाते हैं मुझे हँस के दिखाते हैं

    उन्हें उम्मीद है मुझ से करूँगा नाम मैं रौशन
    बनूँगा शान मैं उन का उन्हीं के राह पे चल कर

    कभी जो टूट जाता हूँ सफ़र में छूट जाता हूँ
    वही इक हाथ देते हैं मुझे गिरने नहीं देते

    वो कहते हैं मेरे बेटे करो मेहनत रखो हिम्मत
    करो कोशिश सदा हरदम अभी उम्मीद मत हारो

    ज़रा सी आँधियाँ हैं ये तुम्हारा क्या बिगाड़ेगी
    यक़ीनन चंद लम्हों में तुम्हें मंज़िल बुलाएगी

    वही जो दूर है तुम से वही फिर पास आएँगे
    जो रिश्ता तोड़ बैठे हैं वही अपना बुलाएँगे

    समय का खेल है सब कुछ समय ही सब बताएगा
    क़दम रोको नहीं इक दिन यही मंज़िल दिलाएगा

    भला कैसे बता 'रंजन' ग़लत का रास्ता चुनता
    पिता के आँख में आँसू भला क्या देख सकता है
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    ABHISHEK RANJAN
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    चलो तुम छोड़कर जाओ यहाँ से

    ज़रा देखूँ कोई आया वहाँ से
    यही है आख़िरी पैग़ाम उस का

    किसी क़ीमत न मंज़िल से मैं भटकूँ
    तमन्ना साथ का करते हैं रब से

    मुझे रस्ता दिखाओ ना तुम मौला
    महक उस इत्र का अब तक न भूला

    लगा जो सामने आई थी मेरी
    मुझे बोला कि सुन ले ऐ मुसाफ़िर

    मिरा दिल साथ ले जाओगे क्या तुम
    लबों से यूँ तो वो कुछ भी न बोली

    दिलों का खेल मानो चल रहा था
    दिलों के पास ही ख़ंजर छुपा था

    हाँ पागल था न मुझ को क्या पता था
    समय आया जहाँ रस्ता अलग था

    मिरा कमरा था उस का तो महल था
    मिटा के फ़ासले कैसे बनाता

    बता 'रंजन' उसे दुल्हन बनाता
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    ABHISHEK RANJAN
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    "गुंडे"
    एक वतन में तो कुछ गुंडे रहते थे
    उन गुंडों से पहले लोग न डरते थे

    गुंडों पर विश्वास किया सत्ता दे दी
    अब वो गुंडा तानाशाही करता है

    हर सरकारी चीज़ की करता नीलामी
    जो बोले फिर उस पर छापा पड़ता है

    जागो जनता उस को वापस मत लाना
    देखो अब तुम बहकावे में मत आना

    वरना फिर देखो अंजाम बुरा होगा
    देश की हालत फिर बद से बदतर होगी

    है मालूम मुझे कि तुम्हें लड़ाएँगे
    तेरे हिस्से की रोटी वो खाएँगे
    असली मुद्दे से तुम को भटकाएँगे

    ठहरो ज़रा इलेक्शन आने वाला है
    सोच समझकर जाओ तुम मतदान करो

    भूल न जाना जाओ अपना मत देना
    सब को देना गुंडों को न मत देना

    वरना 'रंजन' देश नहीं बच पाएगा
    डेमोक्रेसी ख़तरे में आ जाएगी
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    ABHISHEK RANJAN
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    अक्सर तन्हा जीवन मुझ को खाता है
    ऐ दिल मुझ को तुझ पे रोना आता है

    मुझ को कोई राज़ की बातें बतला दो
    पढ़े बिना नंबर वो कैसे लाता है

    पैसे वाले बच्चे मेहनत क्या जाने
    उन के ख़ातिर पेपर होटल आता है

    मूवी देखेंगे पर कह दो पहले क्यूँ
    कॉल करूँ तो नंबर व्यस्त बताता है

    ग़ौर करेंगे क्यूँ इस बहर में लिखता हूँ
    दो के वज़्न में नाम का अंतिम आता है

    जब भी आओ दिल से दिल की बात कहो
    तुम से मिलना मेरे दिल को भाता है

    मेरे शे'रों को सुनके 'रंजन' बोला
    बस कर पगले ऐसे कौन रुलाता है
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    ABHISHEK RANJAN
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    बहर-ए-मीर में लिखता जाऊँ तुम बोलो तो
    बोलो तो फिर ग़जल सुनाऊँ तुम बोलो तो

    जिस चेहरे के काइल हो तुम फिल्टर है वो
    असली चेहरा तुम्हें दिखाऊँ तुम बोलो तो

    मुझ को तुम से मिलना है रिश्वत लोगी क्या
    गुलदस्ता तैयार कराऊँ तुम बोलो तो

    तुम ने बोला सखियों के संग में आओगी
    मैं भी अपने यार बुलाऊँ तुम बोलो तो

    रंजन हम ने इक थाली में खाए हैं पर
    फिर भी अपनी जात बताऊँ तुम बोलो तो
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    ABHISHEK RANJAN
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    नज़रों से जादू करती है वो लड़की
    लड़कों पर क़ाबू करती है वो लड़की

    दिल के कमरों में रहती है वो जा कर
    शब जानू बाबू करती है वो लड़की

    सौदेबाज़ी कहाँ नहीं करती है
    जीएसटी लागू करती है वो लड़की
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    ABHISHEK RANJAN
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    बता कहाँ हम ने कुछ बोला अब कैसे यूँ कह सकते हो
    गर कोई भी कुछ भी बोले बिना यक़ीं के रह सकते हो

    नहीं है शोहरत नहीं है दौलत इतना उड़ना अच्छा है क्या
    हवा का रुख़ है बदला बदला पतझड़ बनकर बह सकते हो

    मैं तो समझो मर ही जाऊँ गर तुम मुझ से दूरी कर लो
    दिल का खेला सीखा था ना मिरे बिना भी रह सकते हो

    छोड़ो भी अब ग़ुस्सा थूको छोटी मोटी बातें है ये
    कर्मों पर तुम क़ाबू पालो पीड़ा को फिर सह सकते हो
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    ABHISHEK RANJAN
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    धूप में छाँव में साँस चलती रही
    दिन गुज़रते गए उम्र ढलती रही

    जो भी आए गए सब ने दुख ही दिए
    बस वो तेरी कमी मुझ को खलती रही

    दिन जवानी के थे हम बहक से गए
    तुम से नज़रें मिलाई ये ग़लती रही

    हम ने सोचा न था इश्क़ हो जाएगा
    प्यार की बात दिल में यूँ पलती रही

    हम जो थे जोश में उस के आग़ोश में
    हम ठहरस गए और वो चलती रही

    एक पल भी न मुड़कर यूँ देखा मुझे
    उस के ख़ातिर ही साँसें मचलती रही
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    ABHISHEK RANJAN
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    तुम्हें दिल में बसाने से मिलेगा क्या भला बोलो
    तुम्हें अपना बनाने से मिलेगा क्या भला बोलो

    अभी तुम नासमझ हो खेलने के दिन तुम्हारे हैं
    भला यूँ रूठ जाने से मिलेगा क्या भला बोलो

    धधकती आग सीने में उसे बुझने न देना तुम
    ग़लत को आज़माने से मिलेगा क्या भला बोलो

    करम क्या है वही तो है जो लोगों की करें सेवा
    सही तमगा मिटाने से मिलेगा क्या भला बोलो

    दिल-ए-नापाक लगते हैं वही जो राज करते हैं
    हमें वापस लड़ाने से मिलेगा क्या भला बोलो
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    ABHISHEK RANJAN
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