बेवफ़ा हूँ दिल है तोड़ा ये सभी इल्हाम करके
वो गया है आज ख़ुद को इस तरह बदनाम करके
है मुहब्बत खेल वो जो खेलना तुझको पड़ेगा
ज़िन्दगी में ज़िन्दगी को सामने नीलाम करके
इश्क़ तुझसे क्यों नहीं करती है वो बस छोड़ दे अब
जानकर भी क्या मिलेगा यूँ तुझे कुहराम करके
कितने नादाँ हैं वो जो ये सोचते हैं बस हमेशा
ज़िन्दगी हम भी जिएँगे फिर कभी सब काम करके
हैं गिले-शिकवे 'अनुज' उस शख़्स से तुमको बहुत ना
कर गया मशहूर तुमको ख़ुद को वो गुमनाम करके
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