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दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे
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बा'द मुद्दत के मेरे बातों में
आज फिर उस का हाँ में हाँ आया
आज फिर उस का हाँ में हाँ आया
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किसी अमल के हिसाब जैसे
तुझे मैं देखूँ जवाब जैसे
तुझे मैं देखूँ जवाब जैसे
शबाब तेरी ये हुस्न-ए-दिल में
छलक पड़ा है शराब जैसे
यूँ ख़ूब-सूरत हँसी है तेरी
खिले चमन के गुलाब जैसे
हैं मुझ
में यूँ तो हज़ार बातें
मगर हूँ चुप मैं किताब जैसे
जो सुब्ह बिस्तर से मैं उठा तो
है देखा माँ को सवाब जैसे
ये अब जो 'अरमान' मैं लिखा हूँ
मगर था पहले ये ख़्वाब जैसे
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ऐसे तिरे इश्क़ में ख़ुद खो गया हूँ मैं
जैसे किसी मेले में गुम हो गया हूँ मैं
जैसे किसी मेले में गुम हो गया हूँ मैं
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पहले ज़िंदाँ में उस की तस्वीर लगाई जाए
फिर चाहे जितना मेरी उम्र क़ैद बढ़ाई जाए
फिर चाहे जितना मेरी उम्र क़ैद बढ़ाई जाए
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