मुसलसल हम भटकते तीरगी में
न लाते गर हमें तुम रौशनी में
न लाते गर हमें तुम रौशनी में
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ज़माने को ज़रूरत है मोहब्बत की मुरव्वत की
मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
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अना हिर्स-ओ-हवस नफ़रत कभी सजने नहीं देंगे
सजाया है अगर जीवन मोहब्बत ने सजाया है
सजाया है अगर जीवन मोहब्बत ने सजाया है
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सदा हो आसरा बस आप का यूँ
कि साँसें बीत जाएँ बंदगी में
कि साँसें बीत जाएँ बंदगी में
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एक तो बेदाग़ है सीरत भी उस की
और लब पर तिल बड़ा बदमाश उस का
और लब पर तिल बड़ा बदमाश उस का
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अना जब छोड़ देगी सारी दुनिया
फिर उल्फ़त ही बचेगी आदमी में
फिर उल्फ़त ही बचेगी आदमी में
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मिटता रहा बदन हस्ती कब रही किसी की
साँसें न लड़ सकीं तो मख़्लूक छोड़ आया
साँसें न लड़ सकीं तो मख़्लूक छोड़ आया
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