तुम्हें ख़ुश देखकर ख़ुश हूँ मगर ये दुख नहीं जाता
    कहाँ पर दाद देनी थी कहाँ पर दे रहे हो तुम
    Vijay Anand Mahir
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    पहले-पहल थोड़ी तो मुश्किल जाएगी
    पर दिल की बगिया फिर से खिल जाएगी

    गर तुझको मुझसे अच्छा मिल सकता है
    तो मुझको तुझसे अच्छी मिल जाएगी
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    Vijay Anand Mahir
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    तुम्हारी एक हरकत से उदासी आए चेहरे पर
    किसी को इस तरह भी मत करो लाचार होली में
    Vijay Anand Mahir
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    खिला कर भंग की गुजिया समा रंगीन कर दो तुम
    बड़ी मुश्क़िल से तो हो पाया है दीदार होली में
    Vijay Anand Mahir
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    भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में लेकर
    दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
    Vijay Anand Mahir
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    उसने, मुझको, जिसकी ख़ातिर छोड़ दिया
    उसने भी तो उसको आख़िर छोड़ दिया
    Vijay Anand Mahir
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    अपना रिश्ता बिल्कुल ऐसा रिश्ता है
    जैसा रिश्ता कपड़ों का अलमारी से
    Vijay Anand Mahir
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    क्यूँ लगती है तुझको उलझन पायल
    तेरे पैरों की है धड़कन पायल

    हम जैसों की जान पे बन आती है
    जब करती है तेरी छनछन पायल

    राधा रानी ने भी बंसी बजाई
    और पहन के नाचे मोहन पायल

    पहला तोहफ़ा देना हो तो देना
    काजल, चूड़ी, बिंदी, कंगन, पायल

    हमने सबका दिल ऐसे रक्खा है
    जैसे पहने कोई बिरहन पायल

    जब-जब भी उनसे मिलना होता है
    'माहिर' बन जाती है दुश्मन पायल
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    Vijay Anand Mahir
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    उल्टा या सीधा दिख जाये
    कोई तो रस्ता दिख जाये

    उसका जब चेहरा दिख जाये
    सहरा में दरिया दिख जाये

    डर मिट जाये गर मलबे में
    कोई भी ज़िंदा दिख जाये

    बच्चों की भूख मिटाना है
    चाहे फिर फंदा दिख जाये

    कब से ढूढ़ रहा, अपनों में
    कोई तो अपना दिख जाये

    मन की आँखों से तो देखो
    मौला जाने क्या दिख जाये

    खिड़की वाली सीट पकड़ ली
    शायद घर उसका दिख जाये

    अब तो 'माहिर' ये आलम है
    बस वो दोबारा दिख जाये
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    Vijay Anand Mahir
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    बेवफ़ा होना तुम्हारा लाज़मी है
    तुमको हम हद से ज़ियादा चाहते थे
    Vijay Anand Mahir
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