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तुम हो मेरा प्यारा गुड्डा
दिल में रहने वाला गुड्डा
दिल में रहने वाला गुड्डा
तुम लट्टू हो मेरे ऊपर
मैं पागल मतवाला गुड्डा
तुम जैसे चंदा पूनम के
मैं चमकीला तारा गुड्डा
बाज़ी जीतूँ मैं हर इक से
तुम पर आ के हारा गुड्डा
जन्नत में जब साथी देना
दे देना दोबारा गुड्डा
तुम कहते हो मुझ-को 'ज़फ़्फू'
मैं कहता हूँ प्यारा गुड्डा
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"ख़ुदा नाराज़"
कमाल है कमाल है
मज़हब की बात पर
क्यूँ उठ रहे सवाल है
बेहाल है बेहाल है
सब मकड़ियों के जाल है
दुनिया में रहना भी अब
बहुत बड़ा जंजाल है
बवाल है बवाल है
गुज़र रही जो ज़िंदगी
ये दिन है या कोई साल है
मुझे आज की फ़िक्र तो है
मुझे कल का भी ख़याल है
नक़ाब है नक़ाब है
हर चेहरे पर नक़ाब है
जो शख़्स की ये ज़ात है
वो साँप का भी बाप है
जो दो-रुख़ा किरदार है
ग़ज़ब है बे-मिसाल है
दलाल है दलाल है
सब सोच के दलाल है
गुनाह भी उस का माफ़ है
सब पैसे की ये चाल है
क्या काल है क्या काल है
ख़ुदा भी जो नाराज़ है
'इबादतों में मिल रहे
जल्दबाज़ी के आ'माल है
ख़ुद सोचना अब तो तू ज़रा
मज़हब की बात पर
क्यूँ उठ रहे सवाल है
कमाल है कमाल है
Read Fullमज़हब की बात पर
क्यूँ उठ रहे सवाल है
बेहाल है बेहाल है
सब मकड़ियों के जाल है
दुनिया में रहना भी अब
बहुत बड़ा जंजाल है
बवाल है बवाल है
गुज़र रही जो ज़िंदगी
ये दिन है या कोई साल है
मुझे आज की फ़िक्र तो है
मुझे कल का भी ख़याल है
नक़ाब है नक़ाब है
हर चेहरे पर नक़ाब है
जो शख़्स की ये ज़ात है
वो साँप का भी बाप है
जो दो-रुख़ा किरदार है
ग़ज़ब है बे-मिसाल है
दलाल है दलाल है
सब सोच के दलाल है
गुनाह भी उस का माफ़ है
सब पैसे की ये चाल है
क्या काल है क्या काल है
ख़ुदा भी जो नाराज़ है
'इबादतों में मिल रहे
जल्दबाज़ी के आ'माल है
ख़ुद सोचना अब तो तू ज़रा
मज़हब की बात पर
क्यूँ उठ रहे सवाल है
कमाल है कमाल है
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"कोई नहीं समझता"
कोई बात नहीं समझता
कोई जज़्बात नहीं समझता
कोई समझ लेता है ख़्वाबों को
पर कोई रात नहीं समझता
कोई दूरी निभाना जानता है
पर कोई साथ नहीं समझता
कोई बग़ैर देखे चुन लेता है साथी
पर कोई ज़ात-पात नहीं समझता
कोई जान लेता है झूठी हँसी
पर कोई हालात नहीं समझता
कोई बात नहीं समझता
तो कोई जज़्बात नहीं समझता
Read Fullकोई जज़्बात नहीं समझता
कोई समझ लेता है ख़्वाबों को
पर कोई रात नहीं समझता
कोई दूरी निभाना जानता है
पर कोई साथ नहीं समझता
कोई बग़ैर देखे चुन लेता है साथी
पर कोई ज़ात-पात नहीं समझता
कोई जान लेता है झूठी हँसी
पर कोई हालात नहीं समझता
कोई बात नहीं समझता
तो कोई जज़्बात नहीं समझता
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"बन्दा और ख़ुदा"
एक मुख़्तसर सी कहानी है
जो ज़फ़र कि मुँह-ज़बानी है
ये हुकूमत आसमानी है
हर मख़्लूक़ रूहानी है
ये ख़ुदा की मेहरबानी है
की सज्दों में झुकती पेशानी है
ये सारी दुनिया फ़ानी है
हर शख़्स को मौत आनी है
ये इंसानियत अय्याशी की दीवानी है
हर शख़्स की ढलती जवानी है
क़ुदरत की पकड़ से कोई नहीं बचा
ये आ रहे अज़ाब क़यामत की निशानी है
ये लोगों की गुमराही और बड़ी नादानी है
की कहाँ ऊपर ख़ुदा को शक्ल हमें दिखानी है
Read Fullजो ज़फ़र कि मुँह-ज़बानी है
ये हुकूमत आसमानी है
हर मख़्लूक़ रूहानी है
ये ख़ुदा की मेहरबानी है
की सज्दों में झुकती पेशानी है
ये सारी दुनिया फ़ानी है
हर शख़्स को मौत आनी है
ये इंसानियत अय्याशी की दीवानी है
हर शख़्स की ढलती जवानी है
क़ुदरत की पकड़ से कोई नहीं बचा
ये आ रहे अज़ाब क़यामत की निशानी है
ये लोगों की गुमराही और बड़ी नादानी है
की कहाँ ऊपर ख़ुदा को शक्ल हमें दिखानी है
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"तुम हो"
तुम सुकून हो पुर-सुकून हो
मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
मैं होश में बाहोश में
मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो
तुम सर्द हो बरसात भी
मिरी गर्मियों की तुम जून हो
तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी
मिरी लिखी नज़्म की धुन हो
मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम
मिरे इस हयात की मम्नून हो
तुम धूप हो मिरी छाँव भी
तुम सियाह रात का मून हो
तुम सिन हो तुम काफ़ भी
तुम वाओ के बा'द की नून हो
तुम सुकून हो पुर-सुकून हो
मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
Read Fullमिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
मैं होश में बाहोश में
मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो
तुम सर्द हो बरसात भी
मिरी गर्मियों की तुम जून हो
तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी
मिरी लिखी नज़्म की धुन हो
मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम
मिरे इस हयात की मम्नून हो
तुम धूप हो मिरी छाँव भी
तुम सियाह रात का मून हो
तुम सिन हो तुम काफ़ भी
तुम वाओ के बा'द की नून हो
तुम सुकून हो पुर-सुकून हो
मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
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