Kaffir

Top 10 of Kaffir

    नाम लिखूँ जो तेरा पत्थर भी मख़मल हो जाए
    चाँद लिखूँ तो सारे तारे भी ओझल हो जाए

    जाम कहूँ तो आँखें तेरी दिखे ओ मेरे काफ़िर
    नाम लूँ तेरा महफ़िल में तो यार ग़ज़ल हो जाए
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    तिरा शहर मेरे सफ़र का भी हक़दार है
    मिरा इश्क़ तेरी वफ़ा का तलबगार है

    तिरे बा'द ये घाव मेरे भरे ही नहीं
    अकेला मेरे मर्ज़ का तू गुनहगार है
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    उस दौर का कह दूँ अगर तो फिर इबादत है मुझे
    अपनी ज़बाँ में गर कहूँ तुम से मोहब्बत है मुझे

    ये इश्क़ हो या ज़हर हो या दर्द हो या हो दवा
    हर चीज़ की अब तो लगी नादान आदत है मुझे
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    डूब कर तेरी आँखों में मैं ने जहाँ देखा है
    तुझ से ज़्यादा हसीं भी किसी ने कहाँ देखा है

    मैं बताऊँ उन्हें जो बताते ख़ुदा है नहीं
    होता है मैं ने देखा है काफ़िर यहाँ देखा है
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    अगर तुम पास बैठो शे'र उस को इक सुना देना
    उसे अच्छा लगे तो एक दो ग़ज़लें भी गा देना

    अगर वो पूछ ले तुम से कि ये जज़्बात किस के हैं
    बताना एक शाइ'र नाम तुम काफ़िर बता देना
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    मेरा अब आने का भी दिल नहीं करता
    कि दस्तक क़ब्र पर क़ातिल नहीं करता

    वो मेरे साथ ग़म तो बाँट लेता है
    वो अपने ग़म मगर शामिल नहीं करता
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    नज़्म-शेरो-शायरी तो बद-दिलों की बात है
    झेलना तूफ़ाँ अभी क्या साहिलों की बात है

    ज़ख़्म देकर क़त्ल तो काफ़िर सभी करते मगर
    बा-मोहब्बत क़त्ल माहिर क़ातिलों की बात है
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    तेरी बातों के सहारे ये कहानी लिखी है
    तेरी यादों के हवाले ये कहानी लिखी है

    एक तोहफ़ा रखा है तेरे लिए काफ़िर ने
    इस जनाज़े के किनारे ये कहानी लिखी है
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    मैं तो बस इक सफ़र का ही परिंदा हूँ
    सफ़र के ख़त्म होने तक ही ज़िंदा हूँ

    मुझे तुम ख़्वाब जन्नत के दिखाओ मत
    मैं दोज़ख़ से निकाला इक दरिंदा हूँ
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