Manish watan

Top 10 of Manish watan

    मुझको किस किसने लूटा है क्या बतलाऊॅं तुमको
    इतने घाव मिले हैं उॅंगली पर गिनना मुश्किल है
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    दिलों की दास्ताँ तो अब ज़मी से जा चुकी है सो
    यहाँ अब आशिक़ों को फ़ाइदा कुछ भी नहीं होगा
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    हर मुश्किल का हल है पैसा
    आज नहीं तो कल है पैसा

    देखो इस मैं इतनी दम है
    अब इंसाँ का बल है पैसा

    शौक़ हुए हैं पैदा इतने
    जीवन मैं बादल है पैसा

    सब है जिसके पास वहीं ये
    यार बहुत पागल है पैसा

    गाँव नहीं है भूखा इसका
    शहरों मैं तो जल है पैसा

    ये हो सब अच्छा लगता है
    आँखों का काजल है पैसा

    पहले लोगों का कहना था
    रिज़्क़ अधिक दलदल है पैसा
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    दोस्त सफ़र में दम घुटने लग जाए तो
    फिर रस्ते में पेड़ लगाना पड़ता है

    दिन भर रोने से आँखों में ख़ूँ आए
    शीशे को चुप चाप कराना पड़ता है
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    मरने वाले को जब कोई याद नहीं रखता
    तो जीने वाला भी फिर फ़रियाद नहीं रखता

    मुझको अब तक है ग़म देखे जाने पर उसके
    मैं ज़िंदा अब ख़ुद को उसके बाद नहीं रखता
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    कौन सुनेगा चुप की भाषा दोस्त यहाँ
    दिल टूटे तो शोर मचाना पड़ता है
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    माना सबको सच्चा प्यार नहीं होता
    पर झूठा भी तो हर बार नहीं होता

    तुमको गर करना है तो कर सकते हो
    लेकिन हमसे लौट के वार नहीं होता

    मन में रहने वाले को सब दिखता है
    इस घर में कोई बेज़ार नहीं होता

    इश्क़ तरीक़ा है करने वालों के लिए
    दोस्त बदन इसका इज़हार नहीं होता

    अब लोगों के चेहरे रंग बदलते हैं
    आईना कोई हुशियार नहीं होता

    उम्र बितानी पड़ती है इक हाँ के लिए
    बातों से कुछ अपना यार नहीं होता

    जो दिल में रहकर भी कर दे ख़ून मिरा
    वो फिर माफ़ी का हक़दार नहीं होता
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    तिरी इक मुलाक़ात से भर गया दिल
    तुझे ज़िंदगी भर मिलेंगे नहीं हम
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    बताकर गया है खुले ज़ख़्म रखना
    कभी ज़ख्म अपने सिलेंगे नहीं हम

    मुनासिब नहीं अब हमारा लगे दिल
    किसी शख़्स पर अब मरेंगे नहीं हम
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    भूल गए मुख से अंदाज़ लगाना सब
    अब लोगों को ज़ख़्म दिखाना पड़ता है
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