Naved sahil

Top 10 of Naved sahil

    उभर कर हिज्र के ग़म से चुनी है ज़िंदगी हम ने
    वगरना हम जहाँ पर थे वहाँ पर ख़ुद-कुशी भी थी
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    हालत तो देख ले मिरी मैं क्या से क्या हुआ
    फिर इश्क़ तू भी करना अगर हौसला हुआ

    जाने के बा'द तेरे मुझे लोग देख कर
    कहते हैं इस के साथ में कितना बुरा हुआ
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    बुरा हूँ तो मुझे महशर दिखाओ
    ख़ुदा अब मौत का मंज़र दिखाओ

    हमारी ज़िंदगी से तो गए तुम
    हमारे दिल से भी जा कर दिखाओ
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    ख़ुदा से बोल देना याद कर के
    वो बूढ़ा मर गया फ़रियाद कर के

    ये पक्षी और कोई बाँध लेगा
    इसे क्या फ़ाइदा आज़ाद कर के

    गुज़रते साल से ये पूछना था
    वो ख़ुश तो है हमें बर्बाद कर के

    ख़ुदा कुछ वक़्त मेरी मौत टालो
    मुझे मरना है सब को शाद कर के

    ये पिछला साल था क़ातिल, तो डर है
    नया मारे न फिर बेदाद कर के
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    तू गया मगर तेरे आने की आस अभी भी बाकी है
    हम दोनो के रिश्ते में कुछ विन्यास अभी भी बाकी है

    बिन मर्ज़ी ब्याही गई लड़की का ये पहला करवाचौथ है
    पानी पी कर व्रत है टूटा पर प्यास अभी भी बाकी है

    क्यूँ माने हम उस ने नाता और किसी से जोड़ा है अब
    उस से बस रिश्ता टूटा है विश्वास अभी भी बाकी है

    सब से मिल कर जाना था हम को तो अब हम चलते हैं पर
    मिल तो लिया सब से ही लेकिन वो ख़ास अभी भी बाकी है

    दीवाली के बा'द गांव जो छोड़ा लगा की जैसे अब की
    दीवाली तो बीत गई पर बन-वास अभी भी बाकी है
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    सज सँवर के सामने जो तुम हमारे आ गए
    यूँ लगा की इस ज़मीं पे सब सितारे आ गए

    कश्ती मेरी डूब कर भी इक नसीहत दे गई
    उस नसीहत के सहारे हम किनारे आ गए

    नेट की दुनिया में हम तो शा'इरी ले आए थे
    वो अजूबे हो गए जो तन उघारे आ गए
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    वक़्त पे यूँ न आना, ग़लत बात है
    फिर बहाने से जाना, ग़लत बात है

    आधी रातों में हम किस को आवाज़ दें
    नींद से यूँ जगाना, ग़लत बात है

    नफ़रतों से भरी जैसी दुनिया है ये
    इस
    में उल्फ़त निभाना, ग़लत बात है

    जिन का घर में कोई और साथी ना हो
    उस का दीपक बुझाना, ग़लत बात है
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