Naved sahil

Top 10 of Naved sahil

    उभर कर हिज्र के ग़म से चुनी है ज़िंदगी हमने
    वगरना हम जहाँ पर थे वहाँ पर ख़ुदकुशी भी थी
    Naved sahil
    23 Likes
    हालत तो देख ले मिरी मैं क्या से क्या हुआ
    फिर इश्क़ तू भी करना अगर हौसला हुआ

    जाने के बाद तेरे मुझे लोग देख कर
    कहते हैं इसके साथ में कितना बुरा हुआ
    Read Full
    Naved sahil
    5 Likes
    बुरा हूँ तो मुझे महशर दिखाओ
    ख़ुदा अब मौत का मंज़र दिखाओ

    हमारी ज़िंदगी से तो गए तुम
    हमारे दिल से भी जा कर दिखाओ
    Read Full
    Naved sahil
    6 Likes
    मौत आए न रब कहीं मुझको
    नींद आती ही अब नहीं मुझको

    तुम भी इस मोड़ पे ले आई न
    छोड़ जाते है सब यहीं मुझको
    Read Full
    Naved sahil
    3 Likes
    ये फिल्मों के कहानीकार झूठे हैं
    हक़ीक़त में तो हीरो हार जाते हैं
    Naved sahil
    5 Likes
    ख़ुदा से बोल देना याद कर के
    वो बूढ़ा मर गया फ़रियाद कर के

    ये पक्षी और कोई बाँध लेगा
    इसे क्या फ़ायदा आज़ाद कर के

    गुज़रते साल से ये पूछना था
    वो ख़ुश तो है हमे बर्बाद कर के

    ख़ुदा कुछ वक़्त मेरी मौत टालो
    मुझे मरना है सबको शाद कर के

    ये पिछला साल था क़ातिल, तो डर है
    नया मारे न फिर बेदाद कर के
    Read Full
    Naved sahil
    3 Likes
    इसके घर में नहीं अब है आटा ख़ुदा
    इसकी रोटी जलाना, ग़लत बात है
    Naved sahil
    5 Likes
    तू गया मगर तेरे आने की आस अभी भी बाकी है
    हम दोनो के रिश्ते में कुछ विन्यास अभी भी बाकी है

    बिन मर्जी ब्याही गई लड़की का ये पहला करवाचौथ है
    पानी पीकर व्रत है टूटा पर प्यास अभी भी बाकी है

    क्यों माने हम उसने नाता और किसी से जोड़ा है अब
    उससे बस रिश्ता टूटा है विश्वास अभी भी बाकी है

    सबसे मिलकर जाना था हमको तो अब हम चलते हैं पर
    मिल तो लिया सबसे ही लेकिन वो खास अभी भी बाकी है

    दीवाली के बाद गांव जो छोड़ा लगा की जैसे अब की
    दीवाली तो बीत गई पर बनवास अभी भी बाकी है
    Read Full
    Naved sahil
    5 Likes
    सज सँवर के सामने जो तुम हमारे आ गये
    यूँ लगा की इस ज़मीं पे सब सितारे आ गये

    कश्ती मेरी डूब कर भी इक नसीहत दे गयी
    उस नसीहत के सहारे हम किनारे आ गये

    नेट की दुनिया में हम तो शायरी ले आए थे
    वो अजूबे हो गए जो तन उघारे आ गये
    Read Full
    Naved sahil
    3 Likes
    वक्त पे यूँ न आना, ग़लत बात है
    फिर बहाने से जाना, ग़लत बात है

    आधी रातों में हम किसको आवाज़ दें
    नींद से यूँ जगाना, ग़लत बात है

    नफ़रतों से भरी जैसी दुनिया है ये
    इसमें उल्फ़त निभाना, ग़लत बात है

    जिनका घर में कोई और साथी ना हो
    उसका दीपक बुझाना, ग़लत बात है
    Read Full
    Naved sahil
    6 Likes

Top 10 of Similar Writers