वक़्त पे यूँँ न आना, ग़लत बात है
फिर बहाने से जाना, ग़लत बात है
आधी रातों में हम किसको आवाज़ दें
नींदस यूँँ जगाना, ग़लत बात है
नफ़रतों से भरी जैसी दुनिया है ये
इस
में उल्फ़त निभाना, ग़लत बात है
जिनका घर में कोई और साथी ना हो
उसका दीपक बुझाना, ग़लत बात है
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