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सिगरेट तो मुझ से कभी छूटी नहींतो फिर मैं कैसे छोड़ सकता हूँ तुम्हें
मैं अकेला तो नहीं हूँ इस सफ़र में ज़िन्दगीख़्वाब, ज़िम्मेदारी, उलझन साथ चलते हैं मिरे
मैं जिस घर में रहता हूँ वो ताज महल हैमुझ को तेरी दौलत से क्या लेना देना
अभी बात होगी, अभी फैसलाभरोसा नहीं है किसी का यहाँ
तेरी यादों में इतना खो जाता हूँख़त लिखते लिखते शायर हो जाता हूँ
हमारा नाम भी बदनाम होगामोहब्बत पूछ कर की जो नही थी
तुम कुछ अपने होटों से भी बोलोआँखों ने तो घायल कर रक्खा है
माँ के हाथों का रोटी का टुकड़ा भीपूरी दिन की भूख मिटाया करता था
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ हैहमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
होली है या फिर फूलों का मौसम हैसब के चेहरों पे रंग है ख़ुशबू भी है