Deepak Vikal

Top 10 of Deepak Vikal

    जंगल जंगल भटकेंगे और ख़ुद जंगल हो जाएँगे
    सहराओं पर उड़ने वाला इक बादल हो जाएँगे

    तन्हा छोड़ के जाने वाले तू ने क्या सोचा था हम
    तेरे हिज्र में रक़्स करेंगे और पागल हो जाएँगे
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    Deepak Vikal
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    तभी गर्दिश में है तारा हमारा
    किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा

    न होती नौकरी तो सोचता हूँ
    वो तब भी देखती रस्ता हमारा

    गुलाबी धूप छत पर आ गई है
    निकल आएगा अब चंदा हमारा

    वो सावन और था दिन और थे तब
    तिरी बाँहों में था झूला हमारा

    लगा दी आग रिश्तों में हमीं ने
    हमीं को खा गया ग़ुस्सा हमारा

    किसी की बद्दुआओं का असर है
    समुंदर पी गया सहरा हमारा

    नहीं सदियों रुके आँसू हमारे
    हमीं पर जब खुला क़िस्सा हमारा
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    Deepak Vikal
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    भले न कहना कि उस की आँखें बहुत हसीं हैं
    मगर उदासी पे शे'र कहना उदास लोगों

    करो तरफ़दारियाँ उदासी की लाख बेशक
    मगर बुरा है उदास रहना उदास लोगों
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    Deepak Vikal
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    मेरे नादाँ दिल उदासी कोई अच्छी शय नहीं
    देख सूखे फूल पर आती नहीं हैं तितलियाँ
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     क्या पता था इस तरह तुझ से जुदा हो जाएँगे
    ढूँढ़ने में तुझ को ख़ुद ही लापता हो जाएँगे

    रौशनी की चाह में भटकेंगे पहले दर-ब-दर
    और फिर हम ख़ुद-ब-ख़ुद जलता दिया हो जाएँगे

    इस लिए भी बात अपने दिल की मैं कहता नहीं
    जानता हूँ लोग सब मुझ से ख़फ़ा हो जाएँगे

    लोग अक्सर पूछते हैं मुझ से तेरी रहगुज़र
    ऐसे तो हम एक दिन तेरा पता हो जाएँगे

    साथ तेरे जाएगी आँखों से ये बीनाई भी
    और आख़िर को सभी मंज़र फ़ना हो जाएँगे

    रास्ता पूछेगा कोई कुछ न बोलेंगे 'विकल'
    हाँ मगर हम ख़ुद उसी का रास्ता हो जाएँगे
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    Deepak Vikal
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    कुछ बाहर कुछ भीतर भीतर रोते हैं
    इश्क़ में पड़ने वाले अक्सर रोते हैं

    मेघ गरजते हैं और बारिश होती है
    धरती पर जब मस्त-कलंदर रोते हैं

    तेरे हिज्र में हँसते भी हैं गाते भी
    कैसी वहशत है जो मिल कर रोते हैं

    हम को तो कुछ मछुआरे बतलाते हैं
    झीलें, दरिया और समुंदर रोते हैं

    कुछ लोगों पर होती है रब की नेमत
    कि़स्मत वाले हैं जो खुलकर रोते हैं

    रोना फ़न है जबसे ये मालूम पड़ा
    रोने वाले हम से बेहतर रोते हैं
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    Deepak Vikal
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    कौन था जिस के उन तक इशारे गए
    बज़्म से यूँ जो उठकर सितारे गए

    जाते जाते गईं सारी फ़नकारियाँ
    देखते देखते सब नज़ारे गए

    जागते जागते अपनी रातें कटीं
    सोते सोते कई दिन गुज़ारे गए

    उन की ख़ातिर हैं हम महज़ इक पैरहन
    सुब्ह धारे गए शब उतारे गए

    पहले जी भर के रौंदे गए तब कहीं
    चाक पर रख के इक दिन सँवारे गए

    हाए! प्यासों पे गुज़रेगी कैसी ख़ुदा
    वो तो प्यासी नदी के किनारे गए

    कोई आवाज़ देता है उस पार से
    गर गए तो समझना कि मारे गए

    क्यूँ मुड़े हुस्ने-जानाँ की जानिब 'विकल'
    इक हमीं तो नहीं जो पुकारे गए
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    Deepak Vikal
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    हम अपनी ज़ीस्त से बेज़ार होकर
    चले हैं काम पर तैयार होकर

    बहुत दिन बा'द चारा-गर हमारा
    मिला हम को बहुत बीमार होकर

    समुंदर में उभर आए किनारे
    सफ़र जब भी किया मयख़्वार होकर

    हमारी परवरिश भी इक सबब है
    जो तुम को चुभ रहे हैं ख़ार होकर

    न ले जाए चुरा कर ख़्वाब कोई
    कि सोना है मुझे बेदार होकर

    मिरी तक़दीर का रौशन सितारा
    पड़ा होगा कहीं बीमार होकर
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    Deepak Vikal
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