kaun tha jiske un tak ishaare ga.e | कौन था जिसके उन तक इशारे गए

  - Deepak Vikal

कौन था जिसके उन तक इशारे गए
बज़्म से यूँँ जो उठकर सितारे गए

जाते जाते गईं सारी फ़नकारियाँ
देखते देखते सब नज़ारे गए

जागते जागते अपनी रातें कटीं
सोते सोते कई दिन गुज़ारे गए

उनकी ख़ातिर हैं हम महज़ इक पैरहन
सुब्ह धारे गये शब उतारे गए

पहले जी भर के रौंदे गये तब कहीं
चाक पर रख के इक दिन सँवारे गए

हाए! प्यासों पे गुज़रेगी कैसी ख़ुदा
वो तो प्यासी नदी के किनारे गए

कोई आवाज़ देता है उस पार से
गर गए तो समझना कि मारे गए

क्यूँँ मुड़े हुस्ने-जानाँ की जानिब 'विकल'
इक हमीं तो नहीं जो पुकारे गए

  - Deepak Vikal

Environment Shayari

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