क्या पता था इस तरह तुझ सेे जुदा हो जाएँगे

ढूँढ़ने में तुझ को ख़ुद ही लापता हो जाएँगे

रौशनी की चाह में भटकेंगे पहले दर-ब-दर
और फिर हम ख़ुद-ब-ख़ुद जलता दिया हो जाएँगे

इस लिए भी बात अपने दिल की मैं कहता नहीं
जानता हूँ लोग सब मुझ से ख़फ़ा हो जाएँगे

लोग अक्सर पूछते हैं मुझ से तेरी रहगुज़र
ऐसे तो हम एक दिन तेरा पता हो जाएँगे

साथ तेरे जाएगी आँखों से ये बीनाई भी
और आख़िर को सभी मंज़र फ़ना हो जाएँगे

रास्ता पूछेगा कोई कुछ न बोलेंगे 'विकल'
हाँ मगर हम ख़ुद उसी का रास्ता हो जाएँगे

— Deepak Vikal

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