tabhi gardish men hai taara hamaara | तभी गर्दिश में है तारा हमारा

  - Deepak Vikal

तभी गर्दिश में है तारा हमारा
किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा

न होती नौकरी तो सोचता हूँ
वो तब भी देखती रस्ता हमारा

गुलाबी धूप छत पर आ गई है
निकल आएगा अब चंदा हमारा

वो सावन और था दिन और थे तब
तिरी बाँहों में था झूला हमारा

लगा दी आग रिश्तों में हमीं ने
हमीं को खा गया ग़ुस्सा हमारा

किसी की बद्दुआओं का असर है
समुंदर पी गया सहरा हमारा

नहीं सदियों रुके आँसू हमारे
हमीं पर जब खुला क़िस्सा हमारा

  - Deepak Vikal

Narazgi Shayari

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