हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ थाकि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ थाये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम परतमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था— Saad Ahmad