हर एक बरगद उदास कर के हर एक संदल उदास करके
चला गया है कोई ये सारे का सारा जंगल उदास करके
हमें लगा था कि वो हमें ज़ख़्म अच्छे अच्छे अता करेगा
मगर हुआ ये पलट गया वो हमें तो केवल उदास करके
ग़ुलाम हाथों को थाम बैठी थी एक शहजादी इश्क़-मारी
हज़ार रेशम उदास करके हज़ार मखमल उदास करके
ये आधे आँसू ये आधी ख़ुशियाँ हम इसके क़ायल कभी नहीं थे
हमारी माने तो छोड़ दीजे हमें मुकम्मल उदास करके
हमारे बस में नहीं है वरना ये रौनक़ें और ये शोर सारा
ख़मोश कर देते सारी दुनिया ये सारी हलचल उदास करके
सड़क ने उसको शदीद रोका गली ने उसको बहुत पुकारा
वो जाने वाला चला गया है तमाम सिग्नल उदास करके
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