Saqib lakhanavi

Saqib lakhanavi

@saqib-lakhanavi

Saqib lakhanavi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saqib lakhanavi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते — Saqib lakhanavi
जिस शख़्स के जीते जी पूछा न गया 'साक़िब' उस शख़्स के मरने पर उट्ठे हैं क़लम कितने — Saqib lakhanavi
बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मिरे जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे — Saqib lakhanavi
मुट्ठियों में ख़ाक ले कर दोस्त आए वक़्त-ए-दफ़्न ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला देने लगे — Saqib lakhanavi
बू-ए-गुल फूलों में रहती थी मगर रह न सकी मैं तो काँटों में रहा और परेशाँ न हुआ — Saqib lakhanavi
आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है — Saqib lakhanavi

Ghazal

कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते लहू था तमन्ना का आँसू नहीं थे बहाए न जाते तो हरगिज़ न बहते वफ़ा भी न होता तो अच्छा था वअ'दा घड़ी दो घड़ी तो कभी शाद रहते हुजूम-ए-तमन्ना से घुटते थे दिल में जो मैं रोकता भी तो नाले न रहते मैं जागूँगा कब तक वो सोएँ गे ता-कै कभी चीख़ उठ्ठूँगा ग़म सहते सहते बताते हैं आँसू कि अब दिल नहीं है जो पानी न होता तो दरिया न बहते ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते कोई नक़्श और कोई दीवार समझा ज़माना हुआ मुझ को चुप रहते रहते मिरी नाव इस ग़म के दरिया में 'साक़िब' किनारे पे आ ही लगी बहते बहते — Saqib lakhanavi