
मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया
मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया
बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा
उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया
— Tehzeeb Hafi
Other sher from the same pen
Shers of heart touching ghar.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling