Khumar Barabankvi

Khumar Barabankvi

@khumar-barabankvi

Khumar Barabankvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khumar Barabankvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं — Khumar Barabankvi
कहूँ किस तरह मैं कि वो बे-वफ़ा है मुझे उस की मजबूरियों का पता है — Khumar Barabankvi
अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतिबार मुझे — Khumar Barabankvi
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा दोस्तों को आज़माते जाइए — Khumar Barabankvi
दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए — Khumar Barabankvi
भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए — Khumar Barabankvi
फूल कर ले निबाह काँटों से आदमी ही न आदमी से मिले — Khumar Barabankvi
रात बाक़ी थी जब वो बिछड़े थे कट गई उम्र रात बाक़ी है — Khumar Barabankvi
तेरे दर से जब उठ के जाना पड़ेगा ख़ुद अपना जनाज़ा उठाना पड़ेगा — Khumar Barabankvi
न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है दिया जल रहा है हवा चल रही है — Khumar Barabankvi
हद से बढ़े जो इल्म तो है जहल दोस्तो सब कुछ जो जानते हैं वो कुछ जानते नहीं — Khumar Barabankvi
ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है — Khumar Barabankvi
चला तो हूँ मैं उन के दर से बिगड़ कर हँसी आ रही है कि आना पड़ेगा — Khumar Barabankvi
हटाए थे जो राह से दोस्तों की वो पत्थर मेरे घर में आने लगे हैं — Khumar Barabankvi
ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही — Khumar Barabankvi
हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए — Khumar Barabankvi
वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं — Khumar Barabankvi
ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं — Khumar Barabankvi

Ghazal

वो सिवा याद आए भुलाने के बा'द ज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बा'द दिल सुलगता रहा आशियाने के बा'द आग ठंडी हुई इक ज़माने के बा'द रौशनी के लिए दिल जलाना पड़ा ऐसी ज़ुल्मत बढ़ी तेरे जाने के बा'द जब न कुछ बन पड़ा अर्ज़-ए-ग़म का जवाब वो ख़फ़ा हो गए मुस्कुराने के बा'द दुश्मनों से पशेमान होना पड़ा दोस्तों का ख़ुलूस आज़माने के बा'द रंज हद से गुज़र के ख़ुशी बन गया हो गए पार हम डूब जाने के बा'द बख़्श दे या रब अहल-ए-हवस को बहिश्त मुझ को क्या चाहिए तुझ को पाने के बा'द कैसे कैसे गिले याद आए 'ख़ुमार' उन के आने से क़ब्ल उन के जाने के बा'द — Khumar Barabankvi
इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए आग़ाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हम से पूछिए जलते दियों में जलते घरों जैसी ज़ौ कहाँ सरकार रौशनी का मज़ा हम से पूछिए वो जान ही गए कि हमें उन सेे प्यार है आँखों की मुख़बिरी का मज़ा हम सेे पूछिए हँसने का शौक़ हम को भी था आप की तरह हँसिए मगर हँसी का मज़ा हम से पूछिए हम तौबा कर के मर गए बे-मौत ऐ 'ख़ुमार' तौहीन-ए-मय-कशी का मज़ा हम से पूछिए — Khumar Barabankvi