इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिएभूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हमक़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए— Khumar Barabankvi