Idris Babar

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@idris-babar

Idris Babar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Idris Babar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

उस की जानिब से भी चाहा है बराबर ख़ुद को मैं ने इक-तरफ़ा मुहब्बत तो कभी की ही नहीं — Idris Babar
उस का नंबर नहीं किसी ने लिया सब समझते रहे परी होगी — Idris Babar
इस कदर मत उदास हो जैसे ये मोहब्बत का आख़िरी दिन है — Idris Babar
वो बहुत दूर है मगर मिरे पास एक ही सम्त का कराया है — Idris Babar
सुना है मरते नहीं प्यार में अनारकली तो कैसा लगता है दीवार में अनारकली? — Idris Babar
मेरी दुनिया में कोई चीज़ ठिकाने पे नहीं बस तुझे देख के लगता है कि सब अच्छा है — Idris Babar
टेंशन से मरेगा न कोरोने से मरेगा इक शख़्स तेरे साथ न होने से मरेगा — Idris Babar

Ghazal

करते फिरते हैं ग़ज़ालाँ तिरा चर्चा साहब हम भी निकले हैं तुझे देखने सहरा साहब ये कुछ आसार हैं इक ख़्वाब-शुदा बस्ती के यहीं बहता था वो दिल नाम का दरिया साहब था यही हाल हमारा भी मगर जागते हैं क्या अजब ख़्वाब सुनाया है दोबारा साहब सहल मत जान कि तुझ रुख़ पे ख़ुदा होते हुए दिल हुआ जाता है गर्द-ए-रह-ए-दुनिया साहब हम न कहते थे कि उस को नज़र-अंदाज़ न कर आइना टूट गया देख लिया ना साहब यूँँ ही दिन डूब रहा हो तो ख़याल आता है यूँँ ही दुनिया से गुज़र जाते हैं क्या क्या साहब आबशारों की जगह दिल में किसी के शब-ओ-रोज़ ख़ाक उड़ती हो तो वो ख़ाक लिखेगा साहब सच कहा आप की दुनिया में हमारा क्या काम हम तो बस यूँँही चले आए थे अच्छा साहब तुम तो क्या इश्क़-ए-बला-ख़ेज़ के आगे बाहर मीर साहब हैं बड़ी चीज़ न मिर्ज़ा साहब — Idris Babar
भाई ख़ुदा के बंदे जानें दिल को जैसे राम किया अपनी बधाई हो दुनिया पर चार छे दिन जो काम किया एक निशानी सी साहिल पर सारी कहानी छोड़ गई डूबती नाव पर उस आख़िरी मौज ने क्या इनआ'म किया प्यारे दुश्मन जीवन जोगी आख़िर तुम भी देख ही लोगे ख़ुद को ख़ैर से कहते सुनोगे हम ने मज़ाक़ जो आम किया नाम पता बे-शक मत लिक्खो पहुँचेगा तुम बस ख़त लिक्खो और इस हद तक गुमनामी में पैदा किस ने नाम किया ख़ुशियाँ ग़म जब हँस रो बैठे आख़िर को सब चुप हो बैठे बुझता अलाव ऊँघते तारे हम ने ख़ूब कलाम किया कुछ मौज़ूँ ना-मौज़ूँ करता या यूँँ करता तो क्यूँ करता लेकिन ख़ाली बैटरी ने भरवाँ बंदूक़ का काम किया — Idris Babar
इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ हम सितारों ने ये सोचा है कि हिजरत कर जाएँ दौलत-ए-ख़्वाब हमारे जो किसी काम न आई अब किसी को नहीं मिलने की वसिय्यत कर जाएँ दहर से हम यूँँही बे-कार चले जाते थे फिर ये सोचा कि चलो एक मोहब्बत कर जाएँ इक ज़रा वक़्त मुयस्सर हो तो आ कर मिरे दोस्त दिल में खिलते हुए फूलों को नसीहत कर जाएँ उन हवा-ख़्वाहों से कहना कि ज़रा शाम ढले आएँ और बज़्म-ए-चराग़ाँ की सदारत कर जाएँ दिल की इक एक ख़राबी का सबब जानते हैं फिर भी मुमकिन है कि हम तुम से मुरव्वत कर जाएँ शहर के बा'द तो सहरा था मियाँ ख़ैर हुई दश्त के पार भला क्या है कि वहशत कर जाएँ रेग-ए-दिल में कई नादीदा परिंदे भी हैं दफ़्न सोचते होंगे कि दरिया की ज़ियारत कर जाएँ — Idris Babar
इंसानी दरिंदे और इस आसानी से मर जाएँ ये सोचने बैठें तो परेशानी से मर जाएँ वो जिन को मुयस्सर थी हर इक चीज़-ए-दिगर भी मुमकिन है सुहूलत की फ़रावानी से मर जाएँ कश्ती पे थे कश्ती को जलाते हुए हज़रात अब आग से बच जाएँ भले पानी से मर जाएँ आईने का ये कौन सा सीज़न है हमें क्या दीवार को तकते हुए हैरानी से मर जाएँ 'बाबर' कोई जज़्बाती क्रोनों से ये पूछे किस खाते में हम आप की नादानी से मर जाएँ ऐ दोस्त मुकम्मल नज़र-अंदाज़ ही कर देख ऐसा न हो हम नीम निगहबानी से मर जाएँ बच जाएँ तो आख़िर किसे क्या फ़र्क़ पड़ेगा दुश्मन न सही दोस्त पशेमानी से मर जाएँ आँखों में उतरते हुए इतराएँ सितारे सूरज हों तो जल कर तिरी पेशानी से मर जाएँ राँझे को तो फिर हीर की तस्वीर बहुत है जी करता था लग कर उसी मरजानी से मर जाएँ — Idris Babar
ख़मोश रह के ज़वाल-ए-सुख़न का ग़म किए जाएँ सवाल ये है कि यूँँ कितनी देर हम किए जाएँ ये नक़्श-गर के लिए सहल भी न हो शायद कि हम से और भी इस ख़ाक पर रक़म किए जाएँ कई गुज़िश्ता ज़माने कई शिकस्ता नुजूम जो दस्तरस में हैं लफ़्ज़ों में कैसे ज़म किए जाएँ ये गोश्वारे ज़बाँ के बहुत सँभाल चुके सौ शे'र काट दिए जाएँ ख़्वाब कम किए जाएँ तेरा ख़याल भी आए तो कितनी देर तलक कई ग़ज़ाल मिरे दश्त-ए-दिल में रम किए जाएँ मैं जानता हूँ ये मुमकिन नहीं मगर ऐ दोस्त मैं चाहता हूँ कि वो ख़्वाब फिर बहम किए जाएँ हिसाब दिल का रखें हम कि दहर का 'बाबर' शुमार दाग़ किए जाएँ या दिरम किए जाएँ — Idris Babar