dil men hai ittifaq se dasht bhi ghar ke saath saath | दिल में है इत्तिफ़ाक़ से दश्त भी घर के साथ साथ

  - Idris Babar

दिल में है इत्तिफ़ाक़ से दश्त भी घर के साथ साथ
इस में क़याम भी करें आप सफ़र के साथ साथ

दर्द का दिल का शाम का बज़्म का मय का जाम का
रंग बदल बदल गया एक नज़र के साथ साथ

ख़्वाब उड़ा दिए गए पेड़ गिरा दिए गए
दोनों भुला दिए गए एक ख़बर के साथ साथ

शाख़ से इस किताब तक ख़ाक से ले के ख़्वाब तक
जाएगा दिल कहाँ तलक उस गुल-ए-तर के साथ साथ

इस को ग़ज़ल समझ के ही सरसरी देखिए सही
ये मिरा हाल-ए-दिल भी है अर्ज़-ए-हुनर के साथ साथ

  - Idris Babar

Rang Shayari

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