Akash Rajpoot

Akash Rajpoot

@Akashrajpoot

Akash Rajpoot shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akash Rajpoot's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

राम जाने वो हक़ीक़त थी कोई या सपना उस ने हाथों में मेरे हाथ दिया था अपना — Akash Rajpoot
ज़माने वो नहीं हैं अब मुहब्बत देखते थे सब करेगी इश्क़ जो मुझ सेे मिरी तनख़्वाह देखेगी — Akash Rajpoot
अब नहीं है ज़ाइक़ा वो दोस्ती में अब फ़क़त रिश्ता निभाया जा रहा है — Akash Rajpoot
ग़म-ए-दुनिया से कहीं दूर ले जाएँ तुम को मिलिए फ़ुर्सत में कभी चाय पिलाएँ तुम को — Akash Rajpoot
बसा लिया है किसी अजनबी ने घर उस को ठगा सा रह गया है उस का चाहने वाला — Akash Rajpoot
मदमस्त महकते फूलों को इन कलियों को चूमा जाए इक ख़्वाहिश मेरी ये भी है तेरी गलियों में घूमा जाए — Akash Rajpoot
करना तो था बहुत कुछ बारहवीं बा'द मैं ने तुम सेे मिली नज़र तो सोचा कि इश्क़ कर लें — Akash Rajpoot
ज़ख़्म ये उन को भी दिखाना है जो समझते हैं सब फ़साना है — Akash Rajpoot
सितम तो ये है कि यारों हमारे होते हुए हमारा चाँद कोई और देखता होगा — Akash Rajpoot
दुनिया की भीड़ में कहीं मेरी पसंद का इक शख़्स गुम गया है सो दुनिया उदास है — Akash Rajpoot
उकता न कहीं जाएँ क़ुर्बत से तिरी जानाँ अच्छा हो जो कुछ दिन की फ़ुर्क़त भी अता करते — Akash Rajpoot
हम तअल्लुक़ जिसे समझते थे वो तअल्लुक़ नहीं तकल्लुफ़ था — Akash Rajpoot
सुनाई दास्ताँ-ए-दर्द-ए-दिल जो महफ़िल में तो लोग कहने लगे वाह वाह क्या कहने — Akash Rajpoot
अब शहर की थकावट बेचैन कर रही है अब शाम हो गई है चल माँ से बात कर लें — Akash Rajpoot
वो बड़े प्यार से कहते हैं कि आप अपने हैं और अपनों को ही तो ज़ख़्म दिए जाते हैं — Akash Rajpoot

Ghazal

हम खोज ही रहे थे इस ज़िंदगी के सानी इतने में मिल गए तुम बन कर के ज़िंदगानी छत पर वो आ गई है मौसम बदल रहा है अब रंग खुल रहा है हल्का सा आसमानी दोनों तरफ़ हमारी मुट्ठी भरी हुई है इस हाथ में क़लम है उस हाथ में किसानी कहते हैं आज उस ने ग़लती क़ुबूल की है सुनते हैं आज उस की आँखें हुई हैं पानी माँ-बाप के बुढ़ापे में काम ग़र न आए किस काम का ये जीवन किस काम की जवानी ये इश्क़ है हमारा बिजली का बिल नहीं है हर बार टालते हो गढ़ कर नई कहानी दुनिया ग़ज़ल हमारी सुनती रहेगी लेकिन इक नज़्म आप को भी फ़ुर्सत में है सुनानी तोहफ़े में जिस ने मुझ को छल्ला कभी दिया था वो इश्क़ आख़िरी था वो आख़िरी निशानी — Akash Rajpoot
न दख़्ल दे न मुझे मशवरा करे कोई जो कर सके तो मुझे ग़मज़दा करे कोई कहाँ तलक किसी की इब्तिग़ा करे कोई कहाँ तलक किसी से इल्तिजा करे कोई मैं वो नहीं जो ज़माने के डर से डर जाए मुझे ख़राब कहे तो कहा करे कोई किसी किसी से तो अपना मिज़ाज मिलता है दिल अब जो उस को भी खो दे तो क्या करे कोई ये बात और है सब सेे अलग खड़ा हूँ मैं मगर जी चाहता है राब्ता करे कोई मिले अगर तो तकल्लुफ़ से क्यूँ मिले कोई न दिल करे तो मुझे क्यूँ मिला करे कोई मैं सच के साथ हूँ इतनी सी इल्तिज़ा है मेरी भले न साथ दे लेकिन दुआ करे कोई तबाह हो के मैं जाऊँ भी तो कहाँ जाऊँ अब ऐसे शख़्स से क्यूँ राब्ता करे कोई — Akash Rajpoot
राह में पलकें बिछाकर टकटकी की जाएगी आप आएँगे तो घर में रौशनी की जाएगी ज़िन्दगी भर ज़ख़्मों की बख़िया-गरी की जाएगी शा'इरी की जा रही है शा'इरी की जाएगी ज़िन्दगी के साथ भी और ज़िन्दगी के बा'द भी चाहने वालों की आँखों में नमी की जाएगी पहले तुम को इश्क़िया बातों से बहलाएगा वो फिर तुम्हारे साथ में धोखाधड़ी की जाएगी यूँँ तो अच्छे लग रहे हैं आप लेकिन आपसे इश्क़ तो क्या ही करेंगे दोस्ती की जाएगी दिल नहीं, बोसा नहीं तो फोन नंबर दीजिए दिन ढले सँझा तले कुछ बात ही की जाएगी आइए नज़दीक और आँखों में आँखें डालिए आज आँखों-आँखों में ही गुदगुदी की जाएगी पहले उस की मखमली आँखों को चूमा जाएगा फिर मुसलसल जिस्म से वाबस्तगी की जाएगी आजकल पेपर हमारे चल रहे हैं इस लिए इश्क़बाजी की ये बातें फिर कभी की जाएगी — Akash Rajpoot

Nazm