bas thodii si aur hawa do kaanha jee | बस थोड़ी सी और हवा दो कान्हा जी

  - Deepak Vikal

बस थोड़ी सी और हवा दो कान्हा जी
नफ़रत की दीवार गिरा दो कान्हा जी

जाने कब से दिल का दरिया सूखा है
प्रेम की इस
में धार बहा दो कान्हा जी

जब भी उस सेे मिलने की ख़्वाहिश जागे
उस दिन को इतवार बना दो कान्हा जी

कब तक यूँँ ही नादानों का भटकेगा
दिल को ज़िम्मेदार बना दो कान्हा जी

मैं भी उसका सुख दुख थोड़ा बाँट सकूँ
इतना सा अधिकार दिला दो कान्हा जी

कब से मैं इस मोह भँवर में अटका हूँ
मुझको गंगा पार लगा दो कान्हा जी

  - Deepak Vikal

Khushboo Shayari

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