हम अपनी ज़ीस्त से बेज़ार होकर
चले हैं काम पर तैयार होकर
बहुत दिन बाद चारागर हमारा
मिला हमको बहुत बीमार होकर
समंदर में उभर आए किनारे
सफ़र जब भी किया मयख़्वार होकर
हमारी परवरिश भी इक सबब है
जो तुमको चुभ रहे हैं ख़ार होकर
न ले जाए चुराकर ख़्वाब कोई
कि सोना है मुझे बेदार होकर
मिरी तक़दीर का रौशन सितारा
पड़ा होगा कहीं बीमार होकर
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