ham apni zindagi se bezaar hokar | हम अपनी ज़ीस्त से बेज़ार होकर

  - Deepak Vikal

हम अपनी ज़ीस्त से बेज़ार होकर
चले हैं काम पर तैयार होकर

बहुत दिन बाद चारागर हमारा
मिला हमको बहुत बीमार होकर

समंदर में उभर आए किनारे
सफ़र जब भी किया मयख़्वार होकर

हमारी परवरिश भी इक सबब है
जो तुमको चुभ रहे हैं ख़ार होकर

न ले जाए चुराकर ख़्वाब कोई
कि सोना है मुझे बेदार होकर

मिरी तक़दीर का रौशन सितारा
पड़ा होगा कहीं बीमार होकर

  - Deepak Vikal

Kismat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Deepak Vikal

As you were reading Shayari by Deepak Vikal

Similar Writers

our suggestion based on Deepak Vikal

Similar Moods

As you were reading Kismat Shayari Shayari