
मुझे भी अपनी क़िस्मत पर हमेशा नाज़ रहता है
सुना है ख़्वाहिशें उन की भी शर्मिंदा नहीं रहती
सुना है वो भी अब तक खाए बैठी हैं कई शौहर
बहुत दिन तक मेरी भी बीवियाँ ज़िंदा नहीं रहती
— Paplu Lucknawi
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