कई तमग़े उन्हें हासिल नहीं थे
नहीं ऐसा कि वो क़ाबिल नहीं थे
कहानी थी हमारी ही वो लेकिन
कहानी में हमीं शामिल नहीं थे
दिलों का भी अँधेरा सोख लेते
उजाले उस तरह नाज़िल नहीं थे
मैं इक ऐसी नदी में ना-ख़ुदा था
नदी जिस के कहीं साहिल नहीं थे
समझते थे तिरी दानिश्वरी भी
अजी हम इस क़दर जाहिल नहीं थे
— Deepak Vikal















