ज़िन्दगी से सिर्फ़ इतना वास्ता रक्खें 'विकल'
यानी केवल आप ही को आश्ना रक्खें 'विकल'
जब चराग़ाँ हो मुसलसल साज़िशों की बू लिए
बेहतरी है रौशनी से फ़ासला रक्खें 'विकल'
देख हमको एक चेहरा है सँवरता बार-बार
क्या ज़रूरत है हमें जो आइना रक्खें 'विकल'
जब हक़ीक़त से ज़ियादा ख़्वाब में आया मज़ा
तब ये सोचा ज़िन्दगी को ख़्वाब सा रक्खें 'विकल'
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