Aakash Giri

Aakash Giri

मैं ग़ज़ल कहता हूँ जिसके काफ़िया हैं राम जी
शायरी में इक नया सा ज़ाविया हैं राम जी

लड़ रही अंदर ही अंदर युध्द जग के रीत से
जो कभी हारी नहीं थी वो सिया हैं राम जी

  • Sher
  • Ghazal

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