गर वो पत्थर हो गया है तो मैं पत्थर देखूँ
इक दफ़ा पर मैं उसे हाथ लगा कर देखूँ
इसलिए 'इश्क़ के मैदान में आया हूँ मैं
खेलता कैसे है वो आख़िरी ओवर देखूँ
मानता है ही नहीं देखा मनाकर मैंने
आख़िरी दाव यही है कि डरा कर देखूँ
और तो कुछ भी नहीं वक़्त की बर्बादी है
छोड़कर आपको गर आपके ज़ेवर देखूँ
खो गई है जो मेरी नींद मुझे मिल जाए
झाड़कर इसलिए हर रोज़ मैं बिस्तर देखूँ
कितनी ही देर कोई देख सके सूरज को
तेरी तस्वीर बहुत तो मैं घड़ी भर देखूँ
हो गया पास मुझे पास ही तो होना था
वो नहीं हूँ मैं कि जो 'इश्क़ में नम्बर देखूँ
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