जब आँख भर के आप को देखा लगा कि बस
कह दूँ मैं आपसे तभी अच्छा लगा कि बस
कहता रहा था वो भी मिरा साथ देगा पर
जो इक ज़रा सा पैर में कांटा लगा कि बस
अंदाज़ हम लगा ही नहीं सकते थे कभी
इतना हसीन आप का चेहरा लगा कि बस
मुझ को यक़ीन इश्क़ कि हर बात पर ही था
फिर इस यक़ीन से मुझे धक्का लगा कि बस
तुम ने मज़ाक़ में जो कहा छोड़ दो मुझे
मुझ को मज़ाक़ भी तेरा ऐसा लगा कि बस
मैं हारता नहीं किसी कीमत पे दिल के फिर
माथे से उस के जा मेरा माथा लगा कि बस
आकाश आज आप की बाहों में मर गया
इक टूटता हुआ सा वो तारा लगा कि बस
— Aakash Giri















