हो गया हूँ मैं भी शामिल उदास लोगों में

लगने लग गया है अब दिल उदास लोगों में

ये जमात तो है बस अक़्ल-मंद लोगों की
होते ही नहीं है जाहिल उदास लोगों में

बात ही नहीं करते सब ख़मोश रहते हैं
दिन गुज़ारना है मुश्किल उदास लोगों में

इंतिज़ार में बैठे लोग सब तुम्हारे है
फूल की तरह जा कर खिल उदास लोगों में

कैसे कह दिया है सिगरेट को बुरा तुम ने
इस नशे के है सब काइल उदास लोगों में

भर गई है पूरी दुनिया उदास लोगों से
एक मैं ही हूँ बस ख़ुश दिल उदास लोगों में

क़त्ल ख़ुद का करते हैं वो भी अपने हाथों से
सब भरे पड़े है क़ातिल उदास लोगों में

— Aakash Giri

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