ghar laut kar kabhi main dobaara nahin gaya | घर लौट कर कभी मैं दुबारा नहीं गया

  - Aakash Giri

घर लौट कर कभी मैं दुबारा नहीं गया
पेपर जो मेरा 'इश्क़ का अच्छा नहीं गया

आया हूँ देखने मैं बदल कौन है मेरा
शादी में यूँँ तो मुझको बुलाया नहीं गया

समझा नहीं सका मैं उसे बात 'इश्क़ की
मुझ सेे कभी गिलास में दरिया नहीं गया

बस हाथ फेरता मैं रहा बाद आपके
इक तार भी गिटार का छेड़ा नहीं गया

करता था सब सेे ज़िक्र तेरी बात बात पर
जब तक सुकून दिल को मेरे आ नहीं गया

हम जी रहे हैं 'इश्क़ की बाज़ी भी हार कर
हर आदमी तो जंग में मारा नहीं गया

थोड़ी बहुत बची थी मोहब्बत तो ख़र्च दी
मतलब यही के जेब से ज़्यादा नहीं गया

  - Aakash Giri

Sukoon Shayari

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