Liyaqat Ali Aasim

Liyaqat Ali Aasim

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Liyaqat Ali Aasim shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Liyaqat Ali Aasim's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

गुज़िश्ता साल कोई मस्लहत रही होगी गुज़िश्ता साल के सुख अब के साल दे मौला — Liyaqat Ali Aasim
हम ने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएँ जिस ने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक — Liyaqat Ali Aasim

Ghazal

कोई आस-पास नहीं रहा तो ख़याल तेरी तरफ़ गया मुझे अपना हाथ भी छू गया तो ख़याल तेरी तरफ़ गया कोई आ के जैसे चला गया कोई जा के जैसे गया नहीं मुझे अपना घर कभी घर लगा तो ख़याल तेरी तरफ़ गया मिरी बे-कली थी शगुफ़्तगी सो बहार मुझ से लिपट गई कहा वहम ने कि ये कौन था तो ख़याल तेरी तरफ़ गया मुझे कब किसी की उमंग थी मिरी अपने आप से जंग थी हुआ जब शिकस्त का सामना तो ख़याल तेरी तरफ़ गया किसी हादसे की ख़बर हुई तो फ़ज़ा की साँस उखड़ गई कोई इत्तिफ़ाक़ से बच गया तो ख़याल तेरी तरफ़ गया तिरे हिज्र में ख़ुर-ओ-ख़्वाब का कई दिन से है यही सिलसिला कोई लुक़्मा हाथ से गिर पड़ा तो ख़याल तेरी तरफ़ गया मिरे इख़्तियार की शिद्दतें मिरी दस्तरस से निकल गईं कभी तू भी सामने आ गया तो ख़याल तेरी तरफ़ गया — Liyaqat Ali Aasim
तू न था तेरी तमन्ना देखने की चीज़ थी दिल न माना वर्ना दुनिया देखने की चीज़ थी क्या ख़बर मेरे जुनूँ को शहर क्यूँँ रास आ गया ऐसे आलम में तो सहरा देखने की चीज़ थी तुम को ऐ आँखों कहाँ रखता मैं कुंज-ए-ख़्वाब में हुस्न था और हुस्न तन्हा देखने की चीज़ थी लम्स की लौ में पिघलता हुज्रा-ए-ज़ात-ओ-सिफ़ात तुम भी होते तो अँधेरा देखने की चीज़ थी आ गया मेरे मकाँ तक और आ कर रह गया बारिशों के ब'अद दरिया देखने की चीज़ थी धूप कहती ही रही मैं धूप हूँ मैं धूप हूँ अपने साए पर भरोसा देखने की चीज़ थी शाम के साए में जैसे पेड़ का साया मिले मेरे मिटने का तमाशा देखने की चीज़ थी — Liyaqat Ali Aasim