लग रही आज भी बेजार तुम्हारी पायल

इतने ग़ुस्से में है क्यूँ यार तुम्हारी पायल

तुम हो ख़ामोश मगर यार सितम तो देखों
करती है शोर लगातार तुम्हारी पायल

तेरे बारे में जो हर बात बता देती है
सच कहूँ तो है अदाकार तुम्हारी पायल

लाज पैरों के तुम्हारे जो रखा करती है
है बड़ी नाज़ कि हकदार तुम्हारी पायल

काम सब छोड़ दिया और बड़ी हसरत से
अब बनाता है वो सोनार तुम्हारी पायल

एक ही बात कहूँगा मैं तुम्हें हर इक बार
सब से आला है ये श्रृंगार तुम्हारी पायल

देख आकाश हुनर सीख गया अब क्या है
बाँध सकता हैं वो भी यार तुम्हारी पायल

— Aakash Giri

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