Hameed Sarwar Bahraichi

Hameed Sarwar Bahraichi

@hameed_sarwar

Hameed Sarwar Bahraichi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hameed Sarwar Bahraichi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher(86)
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Sher

हमारे ख़्वाब समुंदर में डूब जाते हैं सो अपने ख़्वाब में हम कश्तियाँ बनाते हैं — Hameed Sarwar Bahraichi
कैसा मंज़र था उन की आँखों में इक समुंदर था उन की आँखों में — Hameed Sarwar Bahraichi
कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं — Hameed Sarwar Bahraichi
ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी — Hameed Sarwar Bahraichi
हज़ारों बार अपनी बेबसी पर रो चुके हैं हम मगर फिर भी हमारी ज़िद है कश्ती पार करने की — Hameed Sarwar Bahraichi
इन आँखों को तुम्हारे हिज्र में बीमार करने की रही हसरत न कोई अब तुम्हें यूँँ प्यार करने की — Hameed Sarwar Bahraichi
यही मुख़्तसर सी कहानी मेरी फ़ना हो गई ज़िंदगानी मेरी — Hameed Sarwar Bahraichi
बिगड़ गई थी जो दुनिया सॅंवार दी हम ने चढ़ा के सर पे मुहब्बत उतार दी हम ने — Hameed Sarwar Bahraichi

Ghazal

ईमान से यूँॅं अपने मुहब्बत किया करो हर मोड़ पर नज़र की हिफ़ाज़त किया करो आदम को उस ख़ुदा ने उतारा ज़मीन पर और कह दिया कि मेरी इता'अत किया करो नबियों में सब ने बस यही पैग़ाम है दिया डरते रहो ख़ुदा से इ़बादत किया करो राहत की है तलाश तो क़ायम करो नमाज़ मिल जाएगा सुकून तिलावत किया करो तौहीद पर चलोगे तो जन्नत में जाओगे अल्लाह और रसूल से उल्फ़त किया करो राज़ी रहो ख़ुदा की हर इक शय से तुम सभी मख़लूक़-ए-क़ायनात की इज़्ज़त किया करो दिन भर की मेहनतों का सिला चाहते हो गर मुश्किल में हौसलों की तिजारत किया करो 'सरवर' तुम्हें मिलेगी मुहब्बत जहान में लेकिन सभी से तुम भी मुहब्बत किया करो — Hameed Sarwar Bahraichi
मुझे ग़म मिले उसे चाह कर मेरी चाहतों का ज़वाल है क्यूँ ख़फ़ा हुआ क्यूँ जुदा हुआ मेरा उस सेे बस ये सवाल है उसे क्या मिले भला इश्क़ में जिसे खा गई हो दिवानगी न तो रो सके न ही हॅंस सके न तो हिज्र है न विसाल है कहीं ख़्वाब में था मिला मुझे उसी ख़्वाब में वो बिछड़ गया कोई अप्सरा थी या महजबीं मेरी हसरतों का सवाल है किसी एक दर पे रुका नहीं किसी एक का भी हुआ नहीं न वो बे-वफ़ा न वो बा-वफ़ा यही उस हसीं का कमाल है मेरी धड़कनों का वो अक्स था मेरी ज़िंदगी का सुतून था वो बिछड़ गया मैं बिखर गया मेरी ज़िंदगी का ये हाल है — Hameed Sarwar Bahraichi

Nazm

"हमारा गाँव" सुनो अपने मैं तेलिया गाँव का क़िस्सा सुनाता हूँ तुम्हें लफ्ज़ों में अपने आज बहराइच दिखाता हूँ जहाँ पर सड़कें कच्ची हैं, जहाँ हर सम्त ग़ुरबत है जहाँ पर आज भी लोगों को शिक्षा की ज़रूरत है जहाँ के लोग पैसों के लिए परदेस जाते हैं वो खा के रूखी सूखी रोटीयाँ पैसे कमाते हैं मगर फिर भी हमारे गाँव के लोगों में उल्फ़त है हमें इस गाँव से हर हाल में बेशक मुहब्बत है मुझे वो खेत, वो बगिया, सभी अब याद आते हैं मैं हूँ लखनऊ में लेकिन मुझे वो सब बुलाते हैं हमारे गाँव से कुछ दूरी पर सरजू निकलती है नहाओ जब भी उस पानी में तो ख़ुशबू निकलती है बताएँ किस क़दर हम धूप में न छाँव में बैठे गए जब भी हम अपने मदरसे तो नाँव में बैठे वो बहता सरजू का पानी हमारा नाँव में होना नज़ारा कितना दिलकश था हमारा गाँव में होना — Hameed Sarwar Bahraichi
नज़्म- अजनबी महबूबा हम तुझे जानते न थे पहले तुझ को पहचानते न थे पहले आज तुझ को जो जान पाए हैं मेरे अश'आर जगमगाए हैं तू कोई आन बान वाली है तू हसीनों में शान वाली है तू समुंदर सा गहरा पानी है तेरे होने से सब कहानी है तू मिला है मुझे मनाने से आज मैं ख़ुश हूँ तेरे आने से तुझ को मैं रास्ता अगर कह दूँ तुझ को जीने का गर हुनर कह दूँ तुझ को अपनी मता-ए-जाॅं कह दूँ तुझ को अपना मैं हमनवा कह दूँ मेरा तुझ सेे ही राब्ता है अब सदियों सदियों का वास्ता है अब दूर मैं तुझ सेे अब किधर जाऊॅं तुझ को मैं देख कर सॅंवर जाऊॅं मुझ को साया भी तेरा भाता है रात दिन तू ही याद आता है तेरे होने से मुयस्सर है सुकूॅं बिन तेरे मैं तो कहीं भी न रहूॅं हो के अनजान अब नहीं जीना बिन तेरे जान अब नहीं जीना तुम पे सब कुछ मैं आज हारा हूँ तुम मेरे और मैं तुम्हारा हूँ — Hameed Sarwar Bahraichi