हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
    वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

    कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
    मिला सुकून जहां में तो रब को भूल गए
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    Hameed Sarwar Bahraichi
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    यही मुख़्तसर सी कहानी मेरी
    फ़ना हो गई ज़िंदगानी मेरी
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    बिगड़ गई थी जो दुनिया सॅंवार दी हमने
    चढ़ा के सर पे मुहब्बत उतार दी हमने

    अँधेरी रात किसी बेवफ़ा की यादों में
    बहुत तवील थी लेकिन गुज़ार दी हमने
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    Hameed Sarwar Bahraichi
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    जो बिन माँगे मिल जाए वो है मुहब्बत
    ख़ुशामद करोगे तो ख़ैरात होगी
    Hameed Sarwar Bahraichi
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    जो कभी मरता नहीं इक शख़्स का किरदार है
    बेहयाई कम नहीं अब इतनी तो रफ़्तार है

    वो भी तो इक वक़्त था जब सबसे अव्वल थी हया
    आज सर पर इक दुपट्टा रखना भी दुश्वार है
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    Hameed Sarwar Bahraichi
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    जो अंजान थे वो मेरे यार निकले
    मगर जो भी अपने थे बेकार निकले

    ज़मीं खा गई उन वफ़ाओं को आख़िर
    सितम ये हुआ हम गुनहगार निकले
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    Hameed Sarwar Bahraichi
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    न ये पागल सा मजनू है, न अब फरहाद लगता है
    पस-ए-मुश्किल, हमारा दिल बड़ा ही शाद लगता है
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    किसी दरख़्त से पूछो कि कैसा लगता है
    किसी से चोट भी खाना उसी को फल देना
    Hameed Sarwar Bahraichi
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    जिस पे गुज़री है वही है जानता
    तुमको कैसे हो मेरे दिल की ख़बर
    Hameed Sarwar Bahraichi
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    हर एक लफ़्ज़ में जादू है तेरी निस्बत से
    यही वजह है तुझे चाहते हैं शिद्दत से

    तेरे ये गाल ये गेसू जवाँ जवाँ यौवन
    निगाह-ए-नाज़ तुझे देखते हैं हसरत से

    ज़रा ठहर न सके थे तो मुतमइन करते
    भले ही हार गया हूँ मैं अपनी क़िस्मत से

    बड़े सलीके से तोड़ा था तू ने दिल मेरा
    कि दिल तो दिल है जिगर काँपता है हैरत से

    अमर तो कुछ भी नहीं है हमीद दुनिया में
    कमा लो कुछ तो यहाँ नेकियाँ मुहब्बत से
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    Hameed Sarwar Bahraichi
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