
जो कभी मरता नहीं इक शख़्स का किरदार है
बेहयाई कम नहीं अब इतनी तो रफ़्तार है
वो भी तो इक वक़्त था जब सब से अव्वल थी हया
आज सर पर इक दुपट्टा रखना भी दुश्वार है
— Hameed Sarwar Bahraichi
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