Sohit Singla

Top 10 of Sohit Singla

    झूठे मंजिल पा रहे हैं चलते चलते
    सच्चे ठोकर खा रहे हैं चलते चलते
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    पहले थी ज़िंदगी सज़ा
    है प्यार अब तो प्यार से
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    उसने जो कहा मैं सब मानता रहा हर दम
    वो जो भी कभी कुछ मैंने कहा नहीं माना
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    जीने का इरादा है मगर फिर भी कहीं से
    कोई तो इशारा हो मिरा अज़्म जवाँ हो
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    कब तलक साथ रहे हम हैं बिछड़ने वाले
    चलते हैं चल के मिलेंगे कभी ख़्वाबों में हम
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    मैं क्या नया करुँगा देकर गुलाब उसको
    जब गुल तमाम कहते हैं लाजवाब उसको

    वो मिल गया है जिसको मदहोश है वो यारो
    बरसों के प्यासे तो हैं कहते सराब उसको

    वो आबिदों की जैसे है इल्तिमास कोई
    और रिंद बा-सफ़ा भी कहते शराब उसको
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    मता'-ए-ज़ीस्त मेरी है सनम आलम का सरमाया
    फ़क़त तेरा ही होकर रहने में सबका ख़सारा है
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    इक नहीं पल इश्क़ में बेज़ार अपना
    जीना क्यूँ जिस्मों बिना दुश्वार अपना

    है फ़ज़ा' ओ ज़ब्त बस यूँ जिस्म मेरा
    प्यार मुझको रखना है बस प्यार अपना

    आके मिल जा यूँ के रूहें इक हो जाएँ
    जिस्म तो मरने को है तैयार अपना
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    उधर वो पागलों सा 'इश्क़ करती है
    इधर मैं ‍हूँ उसे ही पगली कहता हूँ
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    मुझे तेरी मुहब्बत भी ज़रूरी है
    ज़रा सी तेरी नफ़रत भी ज़रूरी है

    जहाँ अपनाए दुत्कारे मुझे लेकिन
    मुझे ख़ुद से ही रग़बत भी ज़रूरी है

    ज़माने के दिलों से वो न रुख़्सत हो
    ख़ुदा की हो इबादत भी ज़रूरी है

    नहीं हो ये ज़ियादा कम मुहब्बत में
    मुहब्बत में क़नाअत भी ज़रूरी है

    करे कोई जतन लाखों मगर फिर भी
    मुक़द्दर की इनायत भी ज़रूरी है
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