अब ये सितम भी ख़ुद पे है
हम और जीना चाहते हैं
हम और जीना चाहते हैं
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वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों
अगर हम से हुए आज़ाद रोयेंगे
अगर हम से हुए आज़ाद रोयेंगे
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ज़मीं से उस का सौदा हो गया है
हमारा बीज पौधा हो गया है
हमारा बीज पौधा हो गया है
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