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मैं मिलूँगा गाम-दर-गाम यक़ीन मत किया कर
तू हो जाएगी री बदनाम यक़ीन मत किया कर
तू हो जाएगी री बदनाम यक़ीन मत किया कर
है वही बुरा जो ऑफ़िस में तेरे क़रीब बैठे
तू रखे जा काम से काम यक़ीन मत किया कर
ये सभी हुए हैं अपनी ही किसी कमी से बर्बाद
कहे दिल-लगी का अंजाम यक़ीन मत किया कर
मैं सुकून से हूँ अब तेरे बगै़र ख़ुश हुआ कर
नहीं पड़ रहा है आराम यक़ीन मत किया कर
है कोई जो याद करता है तुझी को सुब्ह और शाम
पी कमाल जाम-दर-जाम यक़ीन मत किया कर
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चख ली उस की आँखों की मय जिस जिस ने
उन के अक़्ल-ओ-होश का आलम क्या होगा
चूड़ियाँ इतराती हों जिस की क़लाई में
फिर उस के आग़ोश का आलम क्या होगा
मैं ने सिर्फ़ तसव्वुर ही किया ख़यालाना
उस के हम-आग़ोश का आलम क्या होगा
कोई कांटा गर धोखे से चुभ जाए
मेरे उस गुल-पोश का आलम क्या होगा
तुम बस मेरी आँखों में देखो और फिर
देखो मेरे जोश का आलम क्या होगा
डूबें हैं महबूब की यादों में यूँ कमाल
आज हमा-तन-गोश का आलम क्या होगा
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ज़िन्दगी है आप और आप का ही है ख़याल
लज़्ज़त-ए-हयात कितने चटपटे है दुनिया में
लज़्ज़त-ए-हयात कितने चटपटे है दुनिया में
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जो घर, गली, शहर, देश खोया ज़रूर लेंगे
नए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे
Read Fullनए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे
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