Abuzar kamaal

Top 10 of Abuzar kamaal

    मोहब्बत नशा है, नशा है मोहब्बत
    जिसे पहले होश आया वो बे-वफ़ा है

    Abuzar kamaal
    3 Likes

    किस को है परवाह यहाँ पे गाय की
    बस पड़ी है दूध की और चाय की

    अब कहानी चलती हैं चारों तरफ़
    और कहीं हाए कहीं पे बाय की

    Abuzar kamaal
    4 Likes

    मुझे आज घर जाना होगा
    न पहचुँ मगर जाना होगा

    गली-दर-गली, शहर-दर-शहर
    पता पूछकर जाना होगा

    सही रास्ता ढूँढ़ने को
    यहाँ से किधर जाना होगा

    ग़लत ले लिया आपने टर्न
    इधर से उधर जाना होगा

    अगर ज़िन्दगी चाहते हो?
    सो तत्का़ल मर जाना होगा

    Abuzar kamaal
    4 Likes

    खिलौना चाहिए और कुछ
    लो दिल लो खेलती रहना

    Abuzar kamaal
    4 Likes

    मैं मिलूँगा गाम-दर-गाम यक़ीन मत किया कर
    तू हो जाएगी री बदनाम यक़ीन मत किया कर

    है वही बुरा जो ऑफिस में तेरे क़रीब बैठे
    तू रखे जा काम से काम यक़ीन मत किया कर

    ये सभी हुए हैं अपनी ही किसी कमी से बर्बाद
    कहे दिल्लगी का अंजाम यक़ीन मत किया कर

    मैं सुकून से हूँ अब तेरे बगै़र ख़ुश हुआ कर
    नहीं पड़ रहा है आराम यक़ीन मत किया कर

    है कोई जो याद करता है तुझी को सुब्ह और शाम
    पी कमाल जाम-दर-जाम यक़ीन मत किया कर

    Abuzar kamaal
    6 Likes

    वादियों में मय-नोश का आलम क्या होगा
    पी के उस मद-होश का आलम क्या होगा

    चख ली उसकी आँखों की मय जिस जिस ने
    उनके अक़्ल-ओ-होश का आलम क्या होगा

    चूड़ियाँ इतराती हों जिसकी क़लाई में
    फिर उसके आग़ोश का आलम क्या होगा

    मैने सिर्फ़ तसव्वुर ही किया ख़्यालाना
    उसके हम-आग़ोश का आलम क्या होगा

    कोई कांटा गर धोखे से चुभ जाए
    मेरे उस गुल-पोश का आलम क्या होगा

    तुम बस मेरी आखों में देखो और फिर
    देखो मेरे जोश का आलम क्या होगा

    डूबें हैं महबूब की यादों में यूँ कमाल
    आज हमा-तन-गोश का आलम क्या होगा

    Abuzar kamaal
    5 Likes

    ज़िन्दगी है आप और आपका ही है ख़याल
    लज़्ज़त-ए-हयात कितने चटपटे है दुनिया में

    Abuzar kamaal
    6 Likes

    जो घर, गली, शहर, देश खोया ज़रूर लेंगे
    नए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे

    सुनो कि तुम जितना सह सको उतना ज़ुल्म करना
    ये याद रखना, के हम भी बदला ज़रूर लेंगे

    Abuzar kamaal
    10 Likes

    क्या टूट गया है दिल जो शोर शराबा है?
    कुछ लोग मरे हैं गाड़ी ही तो पलट गइ है

    Abuzar kamaal
    7 Likes

    जो बाहर है
    वो भीतर है

    कुछ मत ढूँढो
    दिल खंडर है

    जाँ लेनी थी
    क्या खंजर है..?

    तुम अंदर हो
    दिल बाहर है

    तनहाईयाँ
    घर-ब-घर है

    नग़्मा-गर की
    आखें तर है

    लिखने मे हम
    पेशे वर है

    हम जैसे तो
    चुटकी भर है

    वो लडकी ही
    चारागर है

    बाहर हम हैं
    घर शौहर है

    तकिये दो हैं
    इक़ चादर है

    ये मातम भी
    बस शब भर है

    Abuzar kamaal
    5 Likes

Top 10 of Similar Writers