मैं मिलूँगा गाम-दर-गाम यक़ीन मत किया कर
तू हो जाएगी री बदनाम यक़ीन मत किया कर
है वही बुरा जो ऑफ़िस में तेरे क़रीब बैठे
तू रखे जा काम से काम यक़ीन मत किया कर
ये सभी हुए हैं अपनी ही किसी कमी से बर्बाद
कहे दिल-लगी का अंजाम यक़ीन मत किया कर
मैं सुकून से हूँ अब तेरे बगै़र ख़ुश हुआ कर
नहीं पड़ रहा है आराम यक़ीन मत किया कर
है कोई जो याद करता है तुझी को सुब्ह और शाम
पी कमाल जाम-दर-जाम यक़ीन मत किया कर
— Abuzar kamaal















